मिन्नी और बोलने वाला पेड़ | बच्चों की दिलचस्प और सीख देने वाली कहानी

मिन्नी और बोलने वाला पेड़ बच्चों की कहानी का चित्र, जंगल में एक लड़की और जादुई पेड़

 एक छोटे से गाँव में मिन्नी नाम की एक प्यारी सी लड़की रहती थी। उसकी उम्र लगभग 10 साल थी। वह बहुत ही सीधी, दयालु और थोड़ी सी जिद्दी भी थी। मिन्नी को सबसे ज्यादा पसंद था अपने घर के पास वाले जंगल में जाना। उस जंगल में बहुत सारे पेड़ थे, चिड़ियाँ थीं, तितलियाँ थीं और ठंडी हवा चलती


रहती थी। जब भी मिन्नी उदास होती, वह चुपचाप जंगल चली जाती और एक बड़े पुराने पेड़ के नीचे बैठ जाती। वह पेड़ बहुत अलग था। उसका तना मोटा था और उसकी शाखाएँ बहुत दूर तक फैली हुई थीं। ऐसा लगता था जैसे वह पेड़ बहुत कुछ जानता हो। एक दिन मिन्नी बहुत उदास थी। उसकी दोस्त रीना ने उससे


बात करना बंद कर दिया था। मिन्नी को समझ नहीं आ रहा था कि उसने क्या गलती की। वह धीरे-धीरे चलते हुए उसी पुराने पेड़ के पास पहुँची और बैठ गई। उसने पेड़ से कहा "काश कोई मुझे समझ पाता" तभी अचानक एक हल्की सी आवाज आई "मैं समझ सकता हूँ" मिन्नी चौंक गई। उसने इधर-उधर देखा लेकिन वहाँ कोई


नहीं था। फिर आवाज आई "डरो मत, मैं यही हूँ" मिन्नी ने ऊपर देखा। आवाज उसी पेड़ से आ रही थी। मिन्नी की आँखें बड़ी हो गईं। उसने धीरे से पूछा "क्या तुम... बोल रहे हो?" पेड़ ने हँसते हुए कहा "हाँ, मैं बोल सकता हूँ। लेकिन मैं हर किसी से बात नहीं करता।" मिन्नी थोड़ी डर गई लेकिन फिर


उसे लगा कि यह पेड़ अच्छा है। उसने पूछा "तुम मुझसे क्यों बात कर रहे हो?" पेड़ बोला "क्योंकि तुम्हारा दिल साफ है। तुम दूसरों की मदद करती हो और कभी झूठ नहीं बोलती।" मिन्नी को थोड़ा अच्छा लगा। उसने पेड़ को अपनी सारी बात बताई कि कैसे उसकी दोस्त उससे नाराज हो गई। पेड़ ने ध्यान से सुना और


बोला "कभी-कभी लोग बिना वजह भी नाराज हो जाते हैं। लेकिन हमें सच्चाई और प्यार से काम लेना चाहिए। तुम उससे बात करो।" अगले दिन मिन्नी ने हिम्मत करके रीना से बात की। पता चला कि रीना को गलतफहमी हो गई थी। दोनों फिर से दोस्त बन गईं। उस दिन मिन्नी बहुत खुश थी। वह दौड़कर पेड़ के पास गई


और बोली "तुम सही थे, सब ठीक हो गया" पेड़ मुस्कुराया "देखा, सच्चाई और हिम्मत हमेशा काम आती है" अब मिन्नी रोज उस पेड़ से मिलने जाती थी। पेड़ उसे हर दिन कुछ नया सिखाता था। एक दिन मिन्नी ने देखा कि कुछ लोग जंगल में आए हैं और पेड़ों को काटने की बात कर रहे हैं। मिन्नी डर गई।


वह दौड़कर पेड़ के पास गई और बोली "वे लोग तुम्हें काट देंगे" पेड़ शांत था। उसने कहा "यह जंगल हम सबका घर है। अगर इसे बचाना है तो तुम्हें कुछ करना होगा" मिन्नी ने पूछा "मैं क्या कर सकती हूँ?" पेड़ बोला "तुम गाँव वालों को समझाओ" मिन्नी ने हिम्मत जुटाई। वह गाँव में गई और सबको बताया कि


जंगल क्यों जरूरी है। उसने कहा कि पेड़ हमें हवा देते हैं, छाया देते हैं और जानवरों का घर होते हैं। पहले तो लोगों ने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया। लेकिन मिन्नी ने हार नहीं मानी। वह हर घर गई। बच्चों को समझाया। स्कूल में बात की। धीरे-धीरे लोग उसकी बात समझने लगे। आखिरकार गाँव वालों ने फैसला किया


कि वे जंगल नहीं कटने देंगे। जब मिन्नी यह खबर लेकर पेड़ के पास गई, पेड़ बहुत खुश हुआ। उसने कहा "तुमने बहुत बड़ा काम किया है" मिन्नी ने मुस्कुराते हुए कहा "यह सब आपने सिखाया" अब मिन्नी पहले से ज्यादा समझदार हो गई थी। वह सिर्फ अपनी नहीं, दूसरों की भी सोचती थी। एक दिन अचानक तेज आँधी आई।


बारिश बहुत जोर से होने लगी। कई पेड़ गिर गए। मिन्नी भागते हुए अपने दोस्त पेड़ के पास पहुँची। पेड़ थोड़ा झुक गया था लेकिन अभी भी खड़ा था। मिन्नी रोते हुए बोली "तुम ठीक हो ना?" पेड़ ने धीरे से कहा "मैं ठीक हूँ, लेकिन शायद ज्यादा दिन नहीं" मिन्नी का दिल टूट गया। उसने कहा "नहीं, तुम मुझे


छोड़कर नहीं जा सकते" पेड़ बोला "हर चीज का एक समय होता है। लेकिन मैं हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा, तुम्हारी यादों में और तुम्हारी अच्छाई में" कुछ दिनों बाद वह पेड़ सच में सूखने लगा। मिन्नी हर दिन उसके पास जाती और उससे बातें करती। एक दिन पेड़ पूरी तरह शांत हो गया। मिन्नी बहुत रोई। उसे लगा जैसे उसने


अपना सबसे अच्छा दोस्त खो दिया। लेकिन फिर उसे पेड़ की बातें याद आईं। उसने तय किया कि वह उस पेड़ की जगह नए पेड़ लगाएगी। उसने गाँव के बच्चों को इकट्ठा किया और सबने मिलकर बहुत सारे नए पौधे लगाए। मिन्नी हर दिन उन पौधों का ख्याल रखती। धीरे-धीरे छोटे पौधे बड़े होने लगे। एक दिन मिन्नी एक छोटे


पौधे के पास बैठी थी। हवा धीरे-धीरे चल रही थी। तभी उसे एक जानी-पहचानी आवाज सुनाई दी "मिन्नी" मिन्नी मुस्कुराई। उसने ऊपर देखा। उसे लगा जैसे वही पुराना पेड़ फिर से उसके पास है। उस दिन उसे समझ आया कि अच्छे काम कभी खत्म नहीं होते। वे हमेशा हमारे साथ रहते हैं। मिन्नी बड़ी होकर भी वही काम करती रही।


वह पेड़ लगाती, लोगों की मदद करती और हमेशा सच का साथ देती। गाँव भी धीरे-धीरे बदल गया। वहाँ हर तरफ हरियाली थी और लोग खुश रहते थे। और उस जंगल में आज भी अगर कोई ध्यान से सुने, तो हवा के साथ एक आवाज आती है "अच्छाई कभी खत्म नहीं होती"


Moral (सीख)

अच्छाई, सच्चाई और दूसरों की मदद करने से जीवन खुशहाल बनता है और छोटे-छोटे अच्छे काम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

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