नन्हा बादल जो बारिश करना सीख गया | बच्चों की सीख भरी कहानी
बहुत समय पहले आसमान में एक छोटा सा बादल रहता था। उसका नाम था “चिंटू बादल”। वह बाकी बादलों से थोड़ा अलग था। जहाँ बाकी बादल आते ही बारिश करने लगते थे, वहीं चिंटू को बारिश करना बिल्कुल पसंद नहीं था। जब भी बड़े-बड़े बादल उसे कहते, “चिंटू, अब नीचे खेतों को पानी देना है”, तो वह तुरंत इधर-उधर भाग
जाता। वह कहता, “मुझे बारिश नहीं करनी, मुझे बस आसमान में घूमना है, खेलना है।” बाकी बादल हँसते थे, लेकिन कुछ बादल उसे समझाते भी थे। एक बूढ़ा बादल था, जिसका नाम था दादाजी बादल। वह हमेशा शांत रहता था और सबको सही रास्ता दिखाता था। एक दिन दादाजी बादल ने चिंटू को बुलाया और प्यार से पूछा, “तुम बारिश
क्यों नहीं करना चाहते?” चिंटू ने मुँह बनाते हुए कहा, “क्योंकि बारिश करने से मैं छोटा हो जाता हूँ, फिर गायब हो जाता हूँ। मुझे डर लगता है।” दादाजी बादल मुस्कुराए और बोले, “तुम गायब नहीं होते, तुम धरती पर जाकर लोगों की मदद करते हो।” लेकिन चिंटू को यह बात समझ नहीं आई। एक दिन सूरज बहुत तेज चमक
रहा था। नीचे धरती पर गर्मी बहुत बढ़ गई थी। पेड़-पौधे सूखने लगे थे। नदियाँ भी धीरे-धीरे सूख रही थीं। बाकी सारे बादल इकट्ठा हुए और उन्होंने तय किया कि आज जोरदार बारिश करनी होगी। सबने मिलकर बारिश शुरू कर दी। लेकिन चिंटू दूर खड़ा देखता रहा। वह सोच रहा था, “सब क्यों इतना मेहनत कर रहे हैं, मुझे तो
बस मजे करने हैं।” तभी अचानक तेज हवा चली। हवा इतनी तेज थी कि चिंटू को अपने साथ उड़ाकर बहुत दूर ले गई। अब वह अकेला था। न कोई दोस्त, न कोई और बादल। वह डर गया। उसने चारों तरफ देखा, लेकिन उसे सिर्फ खाली आसमान दिख रहा था। वह धीरे-धीरे नीचे की ओर आया। नीचे एक बड़ा रेगिस्तान था।
चारों तरफ सिर्फ रेत ही रेत थी। वहाँ कोई पेड़ नहीं था, कोई पानी नहीं था। जानवर भी बहुत परेशान थे। एक छोटा सा ऊँट का बच्चा था, जो प्यास से तड़प रहा था। उसने आसमान की ओर देखा और कहा, “काश बारिश हो जाए।” चिंटू यह सब देख रहा था। उसका दिल थोड़ा दुखी हुआ, लेकिन फिर भी उसने
सोचा, “मैं क्या कर सकता हूँ, मैं तो बारिश करना ही नहीं चाहता।” वह आगे बढ़ गया। थोड़ी दूर पर उसे एक छोटा सा गाँव दिखा। वहाँ के लोग भी बहुत परेशान थे। बच्चों के पास पानी नहीं था। खेत सूख चुके थे। एक छोटी लड़की अपनी माँ से कह रही थी, “माँ, पानी कब आएगा? मुझे बहुत प्यास लगी
है।” माँ ने आसमान की ओर देखा और कहा, “जब बादल आएंगे, तब बारिश होगी।” चिंटू यह सब सुन रहा था। उसे थोड़ा अजीब लगा। वह सोचने लगा, “क्या सच में मेरी वजह से लोगों को पानी मिल सकता है?” लेकिन फिर उसने सिर हिलाया और कहा, “नहीं, मैं बारिश नहीं करूँगा।” वह आगे बढ़ गया। रात हो गई। आसमान
में चाँद निकल आया। चिंटू अकेला था। उसे अपने दोस्तों की याद आने लगी। उसे दादाजी बादल की बातें याद आईं। “तुम गायब नहीं होते, तुम लोगों की मदद करते हो।” चिंटू सोच में पड़ गया। अगले दिन वह एक जंगल के ऊपर पहुँचा। वहाँ पेड़ सूख रहे थे। चिड़ियाँ चुप थीं। जानवर पानी के लिए इधर-उधर भटक रहे थे।
एक छोटा सा हिरन जमीन पर बैठा था। वह बहुत कमजोर लग रहा था। चिंटू अब बहुत दुखी हो गया। उसने पहली बार महसूस किया कि उसकी एक छोटी सी मदद कितनी बड़ी हो सकती है। उसने डरते हुए सोचा, “क्या मैं कोशिश करूँ?” उसे डर लग रहा था कि वह छोटा हो जाएगा। लेकिन अब उसे दूसरों का दर्द
ज्यादा बड़ा लग रहा था। उसने आँखें बंद कीं और धीरे-धीरे बारिश करने की कोशिश की। पहले तो कुछ नहीं हुआ। फिर उसने हिम्मत नहीं छोड़ी। उसने फिर कोशिश की। इस बार हल्की-हल्की बूंदें गिरने लगीं। जैसे ही पानी जमीन पर गिरा, जानवर खुश हो गए। चिड़ियाँ चहचहाने लगीं। पेड़ों ने जैसे राहत की साँस ली। चिंटू को बहुत अच्छा
लगा। वह बोला, “अरे, यह तो बहुत अच्छा है!” अब वह जोर से बारिश करने लगा। पूरा जंगल खुश हो गया। हिरन उठकर दौड़ने लगा। चिड़ियाँ नाचने लगीं। चिंटू को अब समझ आ गया था कि बारिश करना कितना जरूरी है। वह अब डर नहीं रहा था। कुछ समय बाद वह सच में छोटा होने लगा। लेकिन इस बार वह
घबराया नहीं। उसे पता था कि वह कुछ अच्छा कर रहा है। धीरे-धीरे वह गायब हो गया। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। कुछ समय बाद सूरज की गर्मी से वही पानी फिर से भाप बनकर आसमान में गया। और फिर एक नया छोटा बादल बना। वह फिर से चिंटू ही था। अब वह पहले जैसा नहीं था। अब वह
समझदार था। वह अपने दोस्तों के पास वापस गया। सब उसे देखकर खुश हो गए। दादाजी बादल मुस्कुराए और बोले, “अब समझ में आया?” चिंटू ने हँसते हुए कहा, “हाँ, अब मैं कभी बारिश करने से नहीं डरूँगा।” उस दिन के बाद चिंटू सबसे मेहनती बादल बन गया। जहाँ भी जरूरत होती, वह सबसे पहले पहुँचता। अब उसे आसमान में
घूमने से ज्यादा खुशी लोगों की मदद करने में मिलती थी। जब भी धरती पर कहीं सूखा पड़ता, लोग आसमान की ओर देखते और कहते, “काश कोई बादल आए” और कुछ ही देर में चिंटू वहाँ पहुँच जाता। धीरे-धीरे उसकी कहानी हर जगह फैल गई। बच्चे उसे “मदद करने वाला बादल” कहने लगे। चिंटू अब सच में खुश था। क्योंकि
उसने सीख लिया था कि असली खुशी खुद के लिए नहीं, दूसरों के लिए जीने में होती है। और आसमान में आज भी अगर तुम ध्यान से देखो, तो तुम्हें एक छोटा सा बादल दिखाई देगा जो मुस्कुराते हुए बारिश करता है। वह कोई और नहीं, हमारा दोस्त चिंटू बादल है।
सीख (Moral) दूसरों की मदद करने से ही असली खुशी मिलती है। अपने डर को छोड़कर अगर हम अच्छा काम करें, तो दुनिया भी खुश होती है और हम भी।

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