Highway 27 ki Khooni Aurat hindi horror story

Highway 27 par safed saree wali bhootni raat mein lift maangte hue

 रात के करीब 11:40 बज रहे थे। सर्दियों का महीना था, और धुंध इतनी घनी कि सामने 10-15 मीटर से ज्यादा कुछ साफ नहीं दिख रहा था। मैं उस रात पहली बार Highway 27 से अकेले गुजर रहा था। मेरा नाम राहुल है… और मैं पेशे से एक सेल्स एजेंट हूँ। उस दिन मुझे शहर से लगभग 120 किलोमीटर दूर एक गाँव में काम से जाना पड़ा था। काम देर से खत्म हुआ, और वापसी में बस यही एक रास्ता था—Highway 27। शुरू में सब ठीक था… लेकिन जैसे-जैसे मैं


आगे बढ़ता गया, एक अजीब सा डर दिल में बैठने लगा। ना कोई गाड़ी… ना कोई इंसान… बस दूर-दूर तक फैला हुआ सुनसान रास्ता… और मेरी गाड़ी की हेडलाइट्स। रेडियो भी अचानक बंद हो गया था। मैंने सोचा नेटवर्क की दिक्कत होगी… लेकिन कुछ तो अजीब था। करीब 12:15 बजे, मैंने देखा—सड़क के किनारे कोई खड़ा है। पहले तो मुझे लगा कोई पेड़ होगा… लेकिन जैसे ही मैं थोड़ा करीब आया… वो हिलने लगा। मेरे हाथ अपने आप ब्रेक पर चले गए। वो एक औरत थी। सफेद साड़ी… लंबे बिखरे


हुए बाल… चेहरा पूरी तरह से बालों से ढका हुआ… और वो धीरे-धीरे अपना हाथ उठाकर लिफ्ट मांग रही थी। मेरे पूरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। इस सुनसान जगह पर… इतनी रात में… एक औरत? दिल कह रहा था—रुको मत… आगे बढ़ जाओ। लेकिन दिमाग कह रहा था—अगर ये सच में किसी मुसीबत में है तो? मैं कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा… फिर न जाने क्या सोचकर गाड़ी धीमी कर दी। जैसे ही गाड़ी उसके पास रुकी… उसने धीरे-धीरे अपना सिर उठाया। उसके बालों के बीच से उसकी आंखें


दिखीं… और मैं जम गया। वो आंखें… बिल्कुल सफेद थीं। ना पुतली… ना कोई रंग… बस सफेद। “भैया… मुझे आगे तक छोड़ दीजिए…” उसकी आवाज बहुत धीमी थी… जैसे गले से नहीं… कहीं और से आ रही हो। मैंने खुद को संभाला और बोला, “कहाँ जाना है?” “बस… आगे… जहां रास्ता खत्म होता है…” उसकी बात सुनकर दिल और तेज धड़कने लगा। Highway 27 का रास्ता आगे जाकर जंगल में खत्म होता है… ये बात मैं जानता था। “बैठ जाइए…” मैंने डरते हुए कहा। वो धीरे-धीरे गाड़ी का दरवाजा खोलकर


पीछे वाली सीट पर बैठ गई। जैसे ही वो अंदर आई… गाड़ी के अंदर का तापमान अचानक गिर गया। सांस से धुआं निकलने लगा। मैंने रियर व्यू मिरर में देखा… वो सिर झुकाए बैठी थी… और उसके बाल सीट पर फैले हुए थे। कुछ मिनट तक गाड़ी में बिल्कुल सन्नाटा रहा। फिर अचानक… “आपको डर नहीं लग रहा?” उसने पूछा। उसकी आवाज अब थोड़ी साफ थी… लेकिन उसमें एक अजीब सी खालीपन था। मैंने झूठ बोलते हुए कहा, “नहीं…” वो धीरे-धीरे हंसने लगी… “सब यही कहते हैं…” मेरे हाथ स्टीयरिंग


पर कांपने लगे। “क्या मतलब?” वो फिर चुप हो गई। कुछ सेकंड बाद… मैंने महसूस किया कि गाड़ी की स्पीड अपने आप कम हो रही है। मैंने एक्सेलरेटर दबाया… लेकिन गाड़ी जैसे भारी हो गई थी। तभी… मुझे अपने कंधे के पास किसी की सांस महसूस हुई। मैंने धीरे-धीरे सिर घुमाया… और जो मैंने देखा… वो मेरी जिंदगी का सबसे डरावना पल था। वो औरत… अब पीछे वाली सीट पर नहीं थी। वो मेरे ठीक पीछे… मेरे कंधे के पास झुकी हुई थी। उसका चेहरा अब साफ दिख रहा था…


आंखें पूरी सफेद… होंठ फटे हुए… और मुंह के कोने से खून बह रहा था। “अब… डर लग रहा है?” उसने फुसफुसाते हुए कहा। मेरे हाथों से स्टीयरिंग छूटते-छूटते बचा। मैंने पूरी ताकत से ब्रेक मारा। गाड़ी सड़क के बीचों-बीच रुक गई। मैं तुरंत बाहर कूद गया। ठंडी हवा… धुंध… और चारों तरफ सन्नाटा। मैंने पीछे मुड़कर देखा… गाड़ी के अंदर कोई नहीं था। मैंने राहत की सांस ली… लेकिन तभी… गाड़ी के शीशे पर अंदर से खरोंचने की आवाज आने लगी। जैसे कोई अंदर से बाहर निकलने की कोशिश


कर रहा हो। मैंने डरते-डरते पास जाकर देखा… अंदर कोई नहीं था… लेकिन शीशे पर धीरे-धीरे खून से एक हाथ का निशान बन रहा था। और फिर… शीशे पर खुद-ब-खुद शब्द लिखने लगे— “वापस बैठो…” मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैं पीछे हटने लगा… तभी अचानक… पीछे से किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रख दिया। मैंने कांपते हुए पीछे मुड़कर देखा… कोई नहीं था। लेकिन उसी वक्त… मेरे कान के पास वही आवाज आई— “तुम मुझे छोड़कर नहीं जा सकते…” मेरे पैर जैसे जम गए थे। मैं भागना


चाहता था… लेकिन शरीर साथ नहीं दे रहा था। और फिर… मेरे सामने, धुंध के बीच… वही औरत फिर से खड़ी थी। इस बार… उसका चेहरा पूरी तरह दिखाई दे रहा था। और वो धीरे-धीरे मेरी तरफ चल रही थी… हर कदम के साथ… उसके पैरों से खून की लकीर सड़क पर बन रही थी। मैंने पीछे मुड़कर देखा… चारों तरफ सिर्फ जंगल था। कोई मदद नहीं… कोई रास्ता नहीं… और वो… अब बिल्कुल मेरे सामने थी। उसने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाया… और बोली— “चलो… जहां रास्ता खत्म होता


है…” उसका हाथ अब भी मेरी तरफ बढ़ा हुआ था… मैं पीछे हटना चाहता था… लेकिन मेरे पैर जैसे जमीन में धंस गए थे। “चलो…” उसने फिर कहा, इस बार उसकी आवाज थोड़ी तेज थी… और उसमें एक अजीब सा गुस्सा था। मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “तुम… तुम कौन हो?” कुछ सेकंड तक वो बिल्कुल चुप रही। फिर धीरे-धीरे उसका चेहरा बदलने लगा… उसकी आंखों की सफेदी में अब काले धब्बे फैलने लगे… जैसे कोई सड़ती हुई चीज हो। “मैं… वही हूं… जिसे किसी ने छोड़ा था… इसी रास्ते पर…”


मेरी सांस रुक गई। “किसने छोड़ा था?” मैंने कांपती आवाज में पूछा। वो अचानक बहुत तेजी से मेरे बिल्कुल करीब आ गई। इतनी करीब… कि मैं उसकी सड़ी हुई सांस महसूस कर सकता था। “तुम जैसे लोगों ने…” मेरे दिल की धड़कन जैसे रुक गई। “मैंने… मैंने कुछ नहीं किया…” मैं बमुश्किल बोल पाया। वो जोर से हंसी… लेकिन वो हंसी इंसानी नहीं थी। जैसे कई लोग एक साथ हंस रहे हों… अलग-अलग आवाजों में। “सब यही कहते हैं…” अचानक मेरे दिमाग में एक झटका सा लगा… जैसे कोई पुरानी


याद जबरदस्ती बाहर आ रही हो। मेरी आंखों के सामने कुछ तस्वीरें चमकने लगीं— एक लड़की… सफेद कपड़ों में… रात… यही Highway 27… और मैं… गाड़ी चला रहा हूं… “नहीं… ये नहीं हो सकता…” मैंने खुद से कहा। वो औरत अब ध्यान से मुझे देख रही थी। “याद आया?” उसने फुसफुसाया। मेरे माथे पर पसीना आ गया। करीब 2 साल पहले… मैं इसी रास्ते से गुजर रहा था… और तब भी… एक लड़की ने मुझसे लिफ्ट मांगी थी। मैंने उसे बैठा लिया था। कुछ देर तक सब ठीक था… लेकिन


फिर उसने अजीब बातें करनी शुरू कर दी थीं… वो बार-बार कह रही थी कि कोई उसका पीछा कर रहा है। मैं डर गया था… और जब उसने मुझसे गाड़ी रोकने को कहा… तो मैंने गाड़ी तेज कर दी… मैं उसे वहीं… उसी सुनसान जगह पर उतारकर भाग गया था। उसके बाद क्या हुआ… मुझे कभी पता नहीं चला। मेरे हाथ कांपने लगे। “तुम… वही हो?” मैंने धीरे से पूछा। उसकी आंखों से अब खून बहने लगा था। “तुम मुझे छोड़कर भाग गए थे…” उसकी आवाज अब गुस्से से कांप


रही थी। “मैं… मैं डर गया था…” “और मैं?” उसने चीखते हुए कहा। अचानक चारों तरफ हवा बहुत तेज चलने लगी। पेड़ों की आवाज… जैसे कोई चिल्ला रहा हो। “मैं अकेली थी… अंधेरे में… मदद के लिए चिल्ला रही थी…” उसकी आवाज अब चारों तरफ गूंज रही थी। “और फिर…” वो अचानक चुप हो गई। कुछ सेकंड के लिए सब कुछ शांत हो गया। फिर उसने धीरे से कहा— “उन्होंने मुझे ढूंढ लिया…” मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। “किसने?” उसने धीरे-धीरे अपना सिर एक तरफ घुमाया… और अंधेरे जंगल


की तरफ इशारा किया। मैंने भी डरते हुए उधर देखा… और मेरा खून जम गया। जंगल के अंदर… धुंध के बीच… कई परछाइयां खड़ी थीं। लंबी… टेढ़ी-मेढ़ी… इंसानों जैसी… लेकिन पूरी तरह इंसान नहीं। उनकी आंखें चमक रही थीं। और वो सब… हमें देख रहे थे। “उन्होंने…” वो फिर बोली… “मुझे जिंदा नहीं छोड़ा…” मेरे पैरों से ताकत खत्म हो गई। मैं वहीं सड़क पर घुटनों के बल गिर गया। “मुझे माफ कर दो…” मैं रोते हुए बोला। “मैंने जानबूझकर नहीं किया…” वो धीरे-धीरे मेरे पास आई… और मेरे सामने


बैठ गई। अब उसका चेहरा बिल्कुल मेरे सामने था। “माफी?” उसने कहा। फिर धीरे से मुस्कुराई… और वो मुस्कान… इंसानी नहीं थी। “अब बहुत देर हो चुकी है…” अचानक… मेरे पीछे खड़ी मेरी गाड़ी अपने आप स्टार्ट हो गई। इंजन जोर-जोर से गूंजने लगा। दरवाजे अपने आप खुलने और बंद होने लगे। और फिर… गाड़ी के अंदर से किसी के चीखने की आवाज आई। मैंने डरकर पीछे देखा… गाड़ी के अंदर… कई हाथ खिड़कियों पर पड़ रहे थे… जैसे कोई अंदर फंसा हो। “ये सब…” वो बोली… “वो लोग हैं…


जिन्होंने मुझे देखा… लेकिन रोका नहीं…” मेरी सांस रुकने लगी। “अब… तुम्हारी बारी है…” उसने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसका स्पर्श बर्फ से भी ठंडा था। मैंने खुद को छुड़ाने की कोशिश की… लेकिन उसकी पकड़ बहुत मजबूत थी। “चलो…” उसने कहा। अचानक… मुझे लगा जैसे जमीन मेरे नीचे से गायब हो रही है। मैं नीचे गिरने लगा… अंधेरे में… बहुत गहरे अंधेरे में… जहां से चीखों की आवाजें आ रही थीं। मैं चिल्ला रहा था… लेकिन मेरी आवाज बाहर नहीं जा रही थी। और आखिरी चीज जो मैंने देखी…


वो उसका चेहरा था… जो अब पूरी तरह बदल चुका था— आंखें काली… मुंह बहुत बड़ा… और उसमें अनगिनत दांत… “अब… तुम भी यहीं रहोगे…” अगले दिन सुबह… Highway 27 पर एक गाड़ी खड़ी मिली। दरवाजा खुला हुआ था… अंदर कोई नहीं था। बस ड्राइवर सीट पर… खून से लिखा था— “वो अब भी लिफ्ट मांगती है…” और उस दिन के बाद… जो भी उस रास्ते से रात में गुजरा… उसने एक ही बात कही— “एक औरत… सफेद साड़ी में… लिफ्ट मांग रही थी…”

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