श्रापित कमरा: एक सच्ची घटना | Horror Story in Hindi
भाई ये जो बात मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ ये कोई सुनी सुनाई डरावनी कहानी नहीं है बल्कि ये मेरे खुद के साथ घटी हुई एक ऐसी खौफनाक घटना है जिसे याद करके आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते हैं और मेरी रूह कांपने लगती है ये बात तब की है जब मेरी नई नई नौकरी लगी थी और मुझे एक कंस्ट्रक्शन कंपनी की तरफ से यूपी के एक बहुत ही छोटे और पिछड़े हुए कस्बे में भेजा गया था मेरी उम्र उस वक्त बाइस तेईस साल रही होगी और मैं पहली बार अपने घर से इतनी दूर
किसी अनजान जगह पर अकेले रहने जा रहा था मेरे मन में काम को लेकर बहुत जोश था लेकिन मुझे रत्ती भर भी अंदाजा नहीं था कि उस कस्बे में मेरा सामना कुछ ऐसी चीजों से होने वाला है जिन्हें विज्ञान या हमारी नॉर्मल दुनिया नहीं मानती वो जगह एक टिपिकल इंडियन गांव जैसी थी जहाँ पक्के मकान कम और पुरानी ईंटों वाले कच्चे घर ज्यादा थे दिन में तो वहां लोगों की थोड़ी बहुत चहल पहल रहती थी लेकिन सूरज ढलते ही वहां ऐसा सन्नाटा छा जाता था जैसे वहां कोई रहता ही ना हो मुझे वहां कम से
कम छह महीने रहकर साइट का काम देखना था इसलिए मुझे रहने के लिए एक किराए का कमरा चाहिए था साइट पर काम करने वाले एक लोकल मुंशी ने मुझे बताया कि कस्बे के बाहरी हिस्से में एक बहुत पुराना मकान है जहाँ मुझे बहुत कम पैसों में एक कमरा मिल जाएगा मेरी सैलरी ज्यादा नहीं थी इसलिए मैंने तुरंत उस मुंशी से कहा कि मुझे वो जगह दिखा दे जब हम वहां पहुंचे तो मैंने देखा कि वो मकान किसी पुरानी हवेली का बचा हुआ हिस्सा लग रहा था जो अब काफी खस्ताहाल हो चुका था उसके आस पास
कोई और घर नहीं था बस कुछ पुराने बड़े बड़े पेड़ थे और खाली खेत थे वहां की हवा में एक अजीब सी सीलन और पुरानी बंद पड़ी मिट्टी की महक थी मुझे वहां घुसते ही एक अजीब सा डर और भारीपन महसूस हुआ लेकिन मैंने खुद को समझाया कि शायद नई जगह है और शहर से दूर है इसलिए मुझे ऐसा अजीब लग रहा है मकान मालिक एक बहुत ही बूढ़ा सा आदमी था जो उसी मकान के आगे वाले हिस्से में एक खाट पर पड़ा रहता था उसने मुझे कमरा दिखा दिया कमरा काफी बड़ा था और उसकी
छत बहुत ऊंची थी जिसमें लकड़ी की पुरानी कड़ियां लगी हुई थीं वहां एक भारी सा लकड़ी का दरवाजा था जो खोलते और बंद करते वक्त बहुत भयानक सी आवाज करता था कमरे का किराया इतना कम था कि मैंने बिना कुछ और सोचे तुरंत हां कर दी उस बूढ़े मकान मालिक ने मुझे चाबी देते वक्त बस एक ही बात कही थी कि बेटा रात को ज्यादा देर तक बाहर मत घूमना और अगर बाहर से कोई भी आवाज आए तो अपना दरवाजा अंदर से मत खोलना मुझे उसकी ये बात सुनकर थोड़ा अजीब लगा लेकिन मैंने सोचा कि
शायद गांव देहात का इलाका है तो जंगली जानवरों या सांप बिच्छू का डर रहता होगा इसलिए बाबा ऐसा बोल रहे हैं मैंने अपना सारा सामान वहां सेट कर लिया और पहले कुछ दिन बहुत ही नॉर्मल तरीके से बीत गए मैं सुबह जल्दी उठकर साइट पर चला जाता था और शाम को थक हार कर वापस आता अपना खाना बनाता और सो जाता दिन भर काम की भागदौड़ में मुझे कुछ भी अजीब सोचने का मौका ही नहीं मिलता था लेकिन धीरे धीरे मुझे उस कमरे की कुछ ऐसी चीजें महसूस होने लगीं जो बिल्कुल भी नॉर्मल नहीं थीं
जैसे वो कमरा बाहर के मौसम के हिसाब से बिल्कुल उल्टा बर्ताव करता था बाहर चाहे जितनी भी भयानक गर्मी या उमस हो उस कमरे के अंदर हमेशा एक अजीब सी ठंडी और भारी हवा बनी रहती थी जैसे वहां कभी धूप पहुंची ही ना हो और एक अजीब सी घुटन हमेशा गले में अटकी रहती थी लगभग एक हफ्ता बीतने के बाद चीजें सच में अजीब होने लगीं ये कोई ऐसी भूत प्रेत की कहानियां नहीं थीं जहाँ अचानक से कोई चुड़ैल सामने आ जाए बल्कि ये सब बहुत ही धीरे धीरे और मेरे दिमाग से खेलने वाले तरीके
से शुरू हुआ मुझे याद है वो मंगलवार की रात थी मैं अपनी खाट पर लेटा हुआ अपने फोन में कुछ देख रहा था रात के करीब ग्यारह बज रहे होंगे और पूरा कस्बा एकदम मुर्दा शांति में डूबा हुआ था तभी मुझे अपने कमरे के ठीक पीछे वाले कच्चे आंगन से कुछ आवाजें आने लगीं वो आवाज ऐसी थी जैसे कोई रात के घने अंधेरे में वहां झाड़ू लगा रहा हो सींक वाली झाड़ू जब सूखी मिट्टी पर रगड़ खाती है तो जो एक सर सर वाली आवाज आती है वो बिल्कुल वैसी ही थी पहले तो मैंने ध्यान
नहीं दिया मुझे लगा कि शायद मकान मालिक रात में कोई काम कर रहा होगा लेकिन फिर मेरा दिमाग ठनका कि इतनी रात को कोई आंगन में झाड़ू क्यों लगाएगा वो भी वो बूढ़ा आदमी जो ठीक से अपने पैरों पर खड़ा भी नहीं हो पाता था मैंने अपनी खिड़की से बाहर झांकने की कोशिश की लेकिन बाहर इतना घना अंधेरा था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन वो आवाज लगातार आ रही थी और ऐसा लग रहा था जैसे कोई ठीक मेरी खिड़की के नीचे ही खड़ा होकर झाड़ू लगा रहा हो करीब पंद्रह बीस मिनट
तक वो झाड़ू लगाने की सर सर आवाज आती रही और फिर एकदम से भारी सन्नाटा छा गया उस रात तो मैं किसी तरह सो गया लेकिन अगले दिन मैंने मुंशी को साइट पर बातों बातों में बताया कि यार वो पीछे वाले आंगन में रात को कोई झाड़ू लगाता है क्या मेरी बात सुनते ही मुंशी के चेहरे का रंग एकदम से उड़ गया उसने मुझे बहुत ही अजीब नजरों से देखा और कहा कि भाई तुम वहां पीछे की तरफ मत जाया करो और रात को जो भी आवाज आए उसे बस अनसुना कर दिया करो उसने मुझे
पूरी बात तो नहीं बताई लेकिन उसकी वो घबराहट देखकर मुझे समझ आ गया था कि ये कोई असली भूत की कहानी जैसा मामला हो सकता है जिसे गांव वाले मुझसे छुपा रहे हैं मेरा दिमाग अब उन छोटी छोटी अजीब चीजों को ज्यादा नोटिस करने लगा था मैं रात को जब भी सोता मुझे ऐसा लगता जैसे मैं उस कमरे में अकेला नहीं हूँ वो जो एक फीलिंग होती है ना जब आपको लगता है कि कोई आपको लगातार घूर रहा है मुझे वो फीलिंग हर वक्त आने लगी थी मेरे कमरे के एक कोने में अंधेरा रहता था
और मुझे हमेशा लगता था कि उस कोने में कोई खड़ा होकर मुझे लगातार देख रहा है डर अब धीरे धीरे मेरे दिमाग के अंदर अपनी जगह बना रहा था ये एक ऐसा साइकोलॉजिकल हॉरर था जो मेरे अंदर ही अंदर मुझे खोखला कर रहा था मैं रात को ठीक से सो नहीं पाता था और अगर मेरी आंख लग भी जाती थी तो मुझे बहुत ही अजीब और भयानक सपने आते थे जिनमें मुझे लगता था कि कोई मेरा गला दबा रहा है और मैं लाख कोशिश करने के बाद भी चीख नहीं पा रहा हूँ मेरी आंखों के
नीचे गहरे काले घेरे पड़ने लगे थे और साइट पर भी मेरा काम में बिल्कुल मन नहीं लगता था एक रात तो हद ही हो गई उस दिन पूरे इलाके में बिजली नहीं थी और बाहर बहुत तेज हवा चल रही थी मैंने अपने कमरे में एक मोमबत्ती जला रखी थी और मैं अपनी खाट पर चुपचाप लेटा हुआ था तभी मैंने देखा कि मोमबत्ती की पीली रोशनी में जो मेरी परछाई सामने वाली दीवार पर बन रही थी वो एकदम से मेरे हिले बिना ही थोड़ी सी हिलने लगी मुझे लगा कि शायद हवा से मोमबत्ती हिल रही होगी
लेकिन मोमबत्ती की लौ एकदम शांत थी और दीवार पर मेरी परछाई का हाथ अपने आप ऊपर की तरफ उठ रहा था जबकि मेरे दोनों हाथ मेरे पेट पर रखे हुए थे ये खौफनाक नजारा देखकर मेरी सांसें अटक गईं मैंने तुरंत मोमबत्ती बुझा दी और रजाई ओढ़कर अपनी आंखें कसकर बंद कर लीं मेरा दिल इतनी जोर से धड़क रहा था कि मुझे अपनी ही धड़कन की आवाज अपने कानों में सुनाई दे रही थी उस रात के बाद मैंने तय कर लिया था कि मैं ये कमरा छोड़ दूंगा लेकिन कस्बे में कोई और सुरक्षित जगह मिलना इतना
आसान नहीं था मुझे कुछ दिन और वहां गुजारने थे और शायद यही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती थी कुछ दिन बाद अमावस्या की रात थी उस दिन मौसम भी बहुत खराब था और शाम से ही हल्की हल्की बारिश हो रही थी मैं अपना खाना खाकर सोने की तैयारी कर ही रहा था कि अचानक मेरे कमरे का तापमान बहुत ज्यादा गिर गया वो ठंड ऐसी नहीं थी जो मौसम की वजह से होती है वो एक ऐसी बर्फ जैसी ठंड थी जो सीधे मेरी हड्डियों के अंदर तक घुस रही थी मेरे मुंह से भाप निकलने लगी
थी और तभी मुझे बाहर से किसी के भारी कदमों की आवाज आने लगी छप छप छप जैसे कोई नंगे पैर गीली मिट्टी पर चल रहा हो वो भारी कदम मेरे कमरे के बंद दरवाजे की तरफ बढ़ रहे थे मैं अपनी जगह पर बर्फ की तरह जम गया था और मेरी नजरें बस उस लकड़ी के दरवाजे पर टिकी थीं वो कदम ठीक मेरे दरवाजे के बाहर आकर रुक गए और एक दम से ऐसा सन्नाटा हो गया कि मुझे लगा मेरे कान सुन्न हो गए हैं मैंने अपनी सांसें रोक ली थीं मुझे लग रहा था कि अभी
मेरा दिल सीने से बाहर आ जाएगा और तभी मुझे वो आवाज सुनाई दी जिसने मेरे शरीर का सारा खून सुखा दिया वो आवाज मेरी मां की थी एकदम साफ और बिल्कुल असली वो कह रही थी कि बेटा दरवाजा खोल मुझे बहुत ठंड लग रही है मुझे अंदर आना है मैं ये सुनकर पूरी तरह से पागल हो गया मेरी मां वहां से छह सौ किलोमीटर दूर मेरे घर पर थी और वो इस वक्त इतनी रात को यहां कैसे आ सकती थी ये सोचना ही बेवकूफी थी लेकिन वो आवाज बिल्कुल सौ प्रतिशत उन्हीं की थी वैसी ही
चिंता भरी और वैसी ही ममता वाली मेरा दिमाग चीख चीख कर कह रहा था कि ये कोई छलावा है कोई खौफनाक घटना है जो मेरे साथ घट रही है लेकिन मेरा दिल कह रहा था कि एक बार दरवाजा खोल कर देख लूँ कि कहीं सच में मेरी मां तो नहीं है वो आवाज लगातार मुझे पुकार रही थी मेरा नाम लेकर बोल रही थी कि बेटा बाहर बहुत अंधेरा है जल्दी दरवाजा खोल दे मुझे महसूस हो रहा था कि दरवाजे के नीचे की झिरी से कोई काली परछाई अंदर की तरफ रेंग रही है और पूरे कमरे
में एक बहुत ही सड़ी हुई और अजीब सी बदबू फैलने लगी थी जैसे कोई जानवर कई दिनों से सड़ रहा हो मेरा शरीर अब मेरे कंट्रोल में नहीं था और ना चाहते हुए भी मेरे कदम धीरे धीरे उस दरवाजे की तरफ बढ़ने लगे थे मैं खुद को रोकना चाहता था मैं चिल्लाना चाहता था लेकिन मेरे अंदर जैसे मेरी अपनी कोई ताकत ही नहीं बची थी मुझे ऐसा लग रहा था जैसे किसी और चीज ने मेरे दिमाग और मेरे शरीर पर पूरा कब्जा कर लिया है मैं उस दरवाजे की कुंडी की तरफ अपना कांपता हुआ हाथ
बढ़ा रहा था और तभी बाहर से मेरी मां की वो रोने वाली आवाज अचानक से एक बहुत ही भयानक और डरावनी हंसी में बदलने लगी और मेरा हाथ कुंडी तक पहुंच गया था और वो भयानक हंसी दरवाजे के ठीक पार से आ रही थी मेरी उंगलियों ने ठंडी लोहे की कुंडी को छू लिया था कि अचानक एक तेज बिजली कड़की और उसकी रोशनी खिड़की से अंदर आई उस पल के लिए मेरा वो सम्मोहन टूटा जो उस अजीब सी शक्ति ने मुझ पर किया था मैंने झटके से अपना हाथ पीछे खींच लिया और मैं पीछे की
तरफ गिर पड़ा वो हंसी अब और भी ज्यादा खौफनाक हो गई थी जैसे दो तीन औरतें एक साथ कर्कश आवाज में हंस रही हों और वो आवाज मेरी मां की तो बिल्कुल भी नहीं थी मुझे समझ आ गया था कि ये जो भी चीज है ये मेरे दिमाग के साथ खेल रही है मेरी सबसे बड़ी कमजोरी का फायदा उठा रही है मैं जमीन पर पड़ा हुआ पीछे खिसकता गया जब तक कि मेरी पीठ दीवार से नहीं टकरा गई मैंने अपने कान बंद कर लिए लेकिन वो हंसी मेरे दिमाग के अंदर गूंज रही थी और फिर
अचानक से दरवाजे पर जोर जोर से धक्के लगने लगे जैसे कोई बाहर से उसे तोड़ने की कोशिश कर रहा हो वो लकड़ी का भारी दरवाजा ऐसे कांप रहा था जैसे अभी उखड़ कर मेरे ऊपर गिर जाएगा मैं बस भगवान का नाम जपने लगा मेरी सांसें इतनी तेज चल रही थीं कि मेरा सीना फटने को हो रहा था कुछ देर तक वो धक्के लगते रहे और फिर सब शांत हो गया वो भयानक सन्नाटा फिर से लौट आया लेकिन मैं अपनी जगह से हिलने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था मैंने वो पूरी रात उसी कोने में
बैठकर गुजारी मेरी आंखें उस दरवाजे पर ही टिकी रहीं और हर छोटी सी आहट पर मेरी जान निकल जाती थी सुबह जब सूरज की पहली किरण खिड़की से अंदर आई तब जाकर मेरी जान में जान आई मैं जैसे तैसे खड़ा हुआ मेरा पूरा शरीर ऐसे दर्द कर रहा था जैसे किसी ने मुझे बहुत पीटा हो मैंने कांपते हाथों से दरवाजा खोला तो बाहर का नजारा एकदम नॉर्मल था मिट्टी गीली थी क्योंकि रात को बारिश हुई थी लेकिन दरवाजे के बाहर एक भी पैरों का निशान नहीं था ये देखकर मेरा दिमाग चकरा गया कि जब रात
भर वहां कोई खड़ा था तो उसके पैरों के निशान क्यों नहीं हैं मैं बिना नहाए धोए सीधा भागकर साइट पर पहुंचा और मुंशी को पकड़ लिया मैंने उसे कसम दी और कहा कि अगर तुमने मुझे आज सच नहीं बताया तो मैं पुलिस बुला लूंगा या काम छोड़कर चला जाऊंगा मेरी हालत देखकर मुंशी समझ गया कि रात को मेरे साथ कुछ बहुत भयानक हुआ है वो मुझे साइट से दूर एक चाय की टपरी पर ले गया और वहां उसने मुझे जो बताया उसने मेरे पैरों तले जमीन खिसका दी उसने बताया कि वो कमरा जिस मकान का
हिस्सा है वो बहुत साल पहले एक बड़े जमींदार का हुआ करता था उस जमींदार ने एक औरत को वहां बंधक बनाकर रखा था और बाद में उसे उसी कमरे के पीछे वाले आंगन में जिंदा दफना दिया था तब से वो जगह श्रापित है और वो औरत की आत्मा वहां भटकती है जो भी उस कमरे में रहने आता है वो उसके दिमाग से खेलती है उसे उसके करीबियों की आवाज में बुलाती है और अगर कोई दरवाजा खोल दे तो वो उसके शरीर पर हावी हो जाती है यानी उस पर भूत चढ़ जाता है मुंशी ने बताया
कि मुझसे पहले भी दो तीन लोग वहां रहने आए थे और उनमें से एक तो सच में पागल हो गया था ये सब सुनकर मेरा खून सूख गया मुझे समझ आ गया कि मैं किसी मामूली डरावनी कहानी का हिस्सा नहीं हूँ बल्कि एक सच्ची भूत की कहानी मेरे साथ घट रही है एक रियल हॉरर स्टोरी जिसका अंजाम मौत या पागलपन हो सकता है मैंने मुंशी से कहा कि मैं आज ही वो कमरा छोड़ रहा हूँ लेकिन मुंशी ने कहा कि आज का दिन मुझे वहां निकालना पड़ेगा क्योंकि नया कमरा मिलने में कम से कम एक
दिन लगेगा उसने मुझे एक ताबीज दिया और कहा कि इसे पहनकर रखना और आज रात चाहे जो भी हो जाए कमरे के बाहर मत निकलना मेरी मजबूरी थी कि मुझे वो एक और रात उसी शापित कमरे में गुजारनी थी मैं शाम होने से पहले ही कमरे में आ गया मैंने अपना सारा सामान पैक कर लिया ताकि सुबह होते ही मैं वहां से भाग सकूं सूरज ढलते ही कमरे का माहौल फिर से बदलने लगा वो अजीब सी सीलन भरी बदबू फिर से हवा में तैरने लगी मैंने कमरे की सारी लाइटें जला दीं और अपने बिस्तर पर
सिकुड़ कर बैठ गया रात के करीब दस बजे होंगे जब मुझे महसूस हुआ कि कमरे की ट्यूबलाइट अजीब तरह से जल बुझ रही है जैसे वोल्टेज कम ज्यादा हो रहा हो और फिर एक झटके में बत्ती गुल हो गई कमरे में घुप्प अंधेरा छा गया बाहर कोई रोशनी नहीं थी और आज मौसम भी अजीब सा शांत था हवा का एक झोंका तक नहीं चल रहा था मैं फोन की टॉर्च जलाने के लिए अपना हाथ फोन की तरफ बढ़ा ही रहा था कि मुझे अपने ठीक कान के पास किसी के सांस लेने की आवाज सुनाई दी
वो सांसें बहुत ठंडी थीं और उनमें से वही सड़ी हुई बदबू आ रही थी मैं जम गया मेरी हिम्मत नहीं हुई कि मैं अपना सिर घुमाकर देखूं कि मेरे पास कौन खड़ा है तभी मेरे फोन की स्क्रीन अपने आप जल उठी और उसकी हल्की सी रोशनी में मैंने देखा कि एक बहुत ही लंबी और काली परछाई दीवार पर रेंग रही है वो किसी इंसान की परछाई नहीं लग रही थी उसके हाथ बहुत लंबे थे और वो धीरे धीरे छत की तरफ बढ़ रही थी मेरा गला सूख चुका था मैं कुछ बोलना चाहता था लेकिन मुंह
से आवाज नहीं निकल रही थी ये एक ऐसा साइकोलॉजिकल हॉरर था जो मुझे अंदर से तोड़ रहा था मुझे लगने लगा था कि मैं अब जिंदा नहीं बचूंगा तभी वो परछाई छत से अचानक नीचे गिरी और मेरे ठीक सामने खड़ी हो गई कमरे में इतना अंधेरा था कि मुझे उसका चेहरा नहीं दिख रहा था बस एक बहुत ही घनी काली आकृति थी जिसका कोई रूप नहीं था उसने अपना एक लंबा हाथ मेरी तरफ बढ़ाया और उसी वक्त मुझे महसूस हुआ कि मेरा शरीर मेरे कंट्रोल से बाहर हो गया है वो पैरानॉर्मल एक्टिविटी अब सीधा मेरे
शरीर पर असर कर रही थी मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने अदृश्य रस्सियों से मुझे जकड़ लिया हो मैं बिस्तर पर पीछे की तरफ गिर गया और वो काली परछाई मेरे ऊपर आकर बैठ गई उसका वजन इतना ज्यादा था कि मेरी पसलियां दबने लगीं मुझे सांस नहीं आ रही थी वो चीज मेरा गला नहीं दबा रही थी लेकिन उसका सिर्फ मेरे ऊपर बैठना ही मेरी जान निकाल रहा था मैं तड़प रहा था मेरे हाथ पैर छटपटा रहे थे लेकिन मैं उस चीज को खुद से दूर नहीं कर पा रहा था तभी मुझे उस परछाई के
चेहरे वाली जगह पर दो चमकती हुई लाल आंखें दिखाई दीं जो मुझे ही घूर रही थीं और फिर पूरे कमरे में वही झाड़ू लगाने वाली सर सर की आवाज गूंजने लगी लेकिन इस बार वो आवाज बाहर आंगन से नहीं बल्कि कमरे के अंदर से आ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे कोई मेरे बिस्तर के चारों तरफ चक्कर लगा रहा हो और झाड़ू से जमीन पर कुछ बना रहा हो मुझे मुंशी का दिया हुआ वो ताबीज याद आया जो मैंने अपने गले में पहना हुआ था मैंने अपनी पूरी ताकत लगा दी अपनी आखिरी सांसों को
इकट्ठा किया और अपने हाथ को झटके से उस ताबीज पर रखा जैसे ही मैंने ताबीज को मुट्ठी में भींचा मुझे ऐसा लगा जैसे मेरे ऊपर से किसी ने कोई बहुत भारी पत्थर हटा दिया हो वो परछाई एक झटके में हवा में गायब हो गई और मैं जोर जोर से खांसते हुए लंबी लंबी सांसें लेने लगा मैं समझ गया था कि अगर मैं एक पल भी और इस कमरे में रुका तो ये चीज मुझे मार डालेगी या मुझ पर पूरी तरह से कब्जा कर लेगी मैंने अपना बैग उठाया और बिना पीछे देखे दरवाजे की तरफ भागा
मैंने कुंडी खोली और दरवाजा अपनी तरफ खींचा लेकिन दरवाजा नहीं खुला मैंने पूरी ताकत लगा दी लेकिन वो भारी लकड़ी का दरवाजा अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने उसे बाहर से किसी बहुत भारी चीज से बंद कर दिया हो या बाहर से कुंडी लगा दी हो मैं दरवाजे को पीटने लगा और मदद के लिए चिल्लाने लगा लेकिन उस सुनसान इलाके में मेरी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था मैं उस कमरे में पूरी तरह से कैद हो गया था और तभी मुझे अपने पीछे से किसी के चलने
की आवाज आई छप छप छप वही गीले पैरों की आवाज जो मैंने कल रात बाहर से सुनी थी लेकिन अब वो आवाज कमरे के अंदर मेरे ठीक पीछे थी और कोई मेरे कान में बिल्कुल धीरे से फुसफुसाया कि अब तू कहां जाएगा वो फुसफुसाहट सुनकर मेरे शरीर का खून जैसे बर्फ बन गया मैंने बहुत हिम्मत करके अपना सिर पीछे की तरफ घुमाया और जो मैंने देखा उसने मेरे दिमाग की नसें फाड़ दीं मेरे ठीक पीछे वो बूढ़ा मकान मालिक खड़ा था लेकिन वो वो नहीं लग रहा था जो दिन में होता था उसका शरीर एक
बहुत ही अजीब और भयानक तरीके से मुड़ा हुआ था जैसे उसकी हड्डियां टूट गई हों उसकी आंखें पूरी तरह से सफेद हो चुकी थीं उनमें कोई पुतली नहीं थी और उसके कपड़े गीली सड़ी हुई मिट्टी से सने हुए थे उस मिट्टी से वही पुरानी कब्र वाली बदबू आ रही थी जो मुझे इतने दिनों से परेशान कर रही थी सबसे खौफनाक बात ये थी कि वो बूढ़ा आदमी हवा में जमीन से थोड़ा ऊपर तैर रहा था उसके पैर जमीन को नहीं छू रहे थे और उसके मुंह से जो आवाज निकल रही थी वो उस बूढ़े की
नहीं बल्कि दो तीन औरतों की मिली जुली भयानक आवाज थी मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था कि ये कोई रियल हॉरर स्टोरी है जो मेरे साथ घट रही है ये कोई सपना नहीं था ये एक असली पैरानॉर्मल एक्टिविटी थी और मैं उसके ठीक बीचों बीच खड़ा था मौत के साये में मैं दरवाजे से चिपक गया और वो बूढ़ा आदमी जो अब पूरी तरह से उस बुरी आत्मा के कब्जे में था धीरे धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगा उसका जबड़ा एक बहुत ही अजीब एंगल पर लटका हुआ था और वो लगातार मुझे देखकर एक
भयानक तरीके से मुस्कुरा रहा था अचानक उसने अपना एक सड़ा हुआ ठंडा हाथ मेरी गर्दन की तरफ बढ़ाया और मुझे बालों से पकड़ कर हवा में उठा दिया उस बूढ़े आदमी में इतनी ताकत आ गई थी जो किसी नॉर्मल इंसान में हो ही नहीं सकती मेरा दम घुटने लगा और मैं हवा में पैर मारने लगा मैंने अपने दोनों हाथों से उसके हाथ को पकड़ा और छुड़ाने की कोशिश की लेकिन उसका हाथ लोहे की तरह सख्त और बर्फ की तरह ठंडा था मेरी आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा था और तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरा
वो ताबीज जो मैंने गले में पहना था वो झटके से टूट कर जमीन पर गिर गया है ताबीज गिरते ही उस आत्मा का गुस्सा और भी ज्यादा बढ़ गया और उसने मुझे पूरी ताकत से कमरे के बीच में फर्श पर दे मारा मेरे सिर में इतनी जोर की चोट लगी कि मुझे लगा मेरी खोपड़ी फट गई है फर्श पर गिरते ही मुझे लगा कि अब मेरा अंत आ गया है वो चीज सिर्फ मुझे मारना नहीं चाहती थी बल्कि वो मेरे अंदर घुसना चाहती थी मुझे पजेशन का वो भयानक एहसास होने लगा था मुझे ऐसा लगने
लगा जैसे मेरे अपने शरीर पर से मेरा कंट्रोल खत्म हो रहा है और कोई और मेरे दिमाग में अपनी जगह बना रहा है मेरी आंखों के सामने अचानक से वो पुराना कच्चा आंगन घूमने लगा और मुझे ऐसा महसूस होने लगा जैसे मैं खुद मिट्टी के नीचे दफन हूँ और मेरे मुंह और नाक में सड़ी हुई मिट्टी भर रही है मैं खांसने लगा और तड़पने लगा लेकिन तभी मेरे अंदर जीने की एक आखिरी इच्छा जागी मैंने पास ही पड़ी अपनी वो भारी टॉर्च उठाई और पूरी ताकत से उस बूढ़े के सिर पर दे मारी वो एक
भयानक चीख मारते हुए पीछे हटा और उसकी पकड़ मेरे दिमाग से एक पल के लिए कमजोर हुई मैंने बिना एक सेकंड बर्बाद किए खिड़की की तरफ छलांग लगा दी मैंने अपने हाथों से खिड़की के पुराने कांच को तोड़ दिया और बाहर आंगन की तरफ कूद गया कांच टूटने से मेरे हाथ और मुंह पर कई गहरे कट लग गए थे और खून बहने लगा था लेकिन उस वक्त मुझे दर्द का कोई एहसास नहीं हो रहा था बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी और पूरा आंगन कीचड़ से भरा हुआ था मैं जैसे ही गिरा मैं तुरंत
उठा और पागलों की तरह उस पुरानी हवेली के मेन गेट की तरफ भागने लगा मेरे पीछे से उस औरत की वो भयानक हंसी और झाड़ू लगाने की सर सर वाली आवाज आ रही थी ऐसा लग रहा था जैसे वो आवाज मेरे चारों तरफ है वो मुझे घेर रही है मैं बस भागता रहा मैं कई बार कीचड़ में गिरा मेरे कपड़े फट गए लेकिन मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा मुझे लगा जैसे कोई मेरे ठीक पीछे दौड़ रहा है जिसकी ठंडी सांसें मेरी गर्दन पर पड़ रही थीं ये कोई मामूली भूत की कहानी नहीं थी ये एक
ऐसा खौफ था जिसने मुझे अंदर तक तोड़ कर रख दिया था मैं उस सुनसान सड़क पर भागता रहा जब तक कि मुझे दूर साइट ऑफिस की हल्की सी रोशनी नहीं दिखाई दी मैं भागते भागते साइट ऑफिस के दरवाजे से टकराया और वहीं बेहोश होकर गिर पड़ा जब मुझे होश आया तो सुबह हो चुकी थी और मैं साइट ऑफिस के अंदर एक चारपाई पर लेटा था मुंशी और कुछ और मजदूर मेरे पास खड़े थे मेरी हालत देखकर वो लोग भी डरे हुए थे मैंने रोते हुए मुंशी को रात की पूरी बात बताई और कहा कि वो
बूढ़ा आदमी मुझे मार डालता मुंशी ने तुरंत पुलिस को बुलाया और हम सब उस कमरे की तरफ गए दिन के उजाले में वो जगह उतनी भयानक नहीं लग रही थी लेकिन मेरे अंदर का डर अभी भी वैसा ही था जब हम वहां पहुंचे तो मेरे कमरे का दरवाजा बाहर से नहीं बल्कि अंदर से बंद था ये देखकर मेरे होश उड़ गए क्योंकि रात को मैंने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की थी और वो नहीं खुला था पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर का नजारा देखकर सबकी रूह कांप गई कमरे के अंदर सब कुछ तहस नहस
था और फर्श पर मेरे खून के निशान थे लेकिन वहां कोई नहीं था पुलिस ने पीछे आंगन में जाकर देखा तो वहां जो मिला उसे देखकर मैं आज भी सो नहीं पाता हूँ वो बूढ़ा मकान मालिक उस कच्चे आंगन की मिट्टी में आधा गड़ा हुआ मरा पड़ा था और उसके मुंह नाक और कानों में पूरी तरह से मिट्टी भरी हुई थी जैसे किसी ने जबरदस्ती उसे वहां दफना दिया हो पुलिस ने इसे एक अजीब मर्डर केस मानकर फाइल बंद कर दी क्योंकि उनके पास कोई सबूत नहीं था लेकिन मुझे और मुंशी को असली सच पता
था मैंने उसी दिन वो शहर छोड़ दिया और अपनी कंपनी से कहकर अपना ट्रांसफर वापस अपने घर की तरफ करवा लिया मेरी नौकरी तो बच गई लेकिन उस रात ने मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी इस खौफनाक सच्ची घटना के बाद से मैं कभी भी अंधेरे में अकेले नहीं सो पाता मेरा इलाज चला और डॉक्टरों ने कहा कि मुझे कोई गहरा सदमा लगा है लेकिन वो नहीं जानते कि मैंने उस रात क्या देखा था आज इस बात को कई साल बीत चुके हैं मैं अब एक बड़े शहर में एक सुरक्षित फ्लैट में रहता हूँ
मेरी जिंदगी नॉर्मल हो गई है लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती कुछ चीजें आपका पीछा कभी नहीं छोड़तीं कल रात जब मैं अपने फ्लैट में सो रहा था तो मुझे अचानक बहुत ज्यादा ठंड लगने लगी और मेरी आंख खुल गई बाहर बहुत तेज बारिश हो रही थी मैंने खुद को समझाने की कोशिश की कि खिड़की खुली होगी इसलिए ठंड लग रही है लेकिन तभी मुझे अपने बंद दरवाजे के बाहर से एक बहुत ही धीमी आवाज सुनाई दी वो झाड़ू लगाने की सर सर वाली आवाज मैंने अपनी रजाई कसकर पकड़ ली और मैं पसीने से भीग
गया मैं सुबह तक अपनी जगह से नहीं हिला जब सुबह धूप निकली तब मैंने डरते डरते अपना दरवाजा खोला बाहर सब नॉर्मल था लेकिन मेरी नजर अचानक फर्श पर गई और मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई मेरे फ्लैट के साफ सुथरे फर्श पर गीली मिट्टी के पैरों के दो निशान छपे हुए थे जो ठीक मेरे दरवाजे की तरफ आ रहे थे और पूरे घर में वही पुरानी सड़ी हुई मिट्टी की बदबू फैली हुई थी मुझे नहीं पता कि वो चीज क्या थी और वो वहां से मेरे साथ यहाँ कैसे आ गई लेकिन अब मुझे लगता
है कि उस रात जब उस बूढ़े ने मुझे छुआ था तो वो सिर्फ मुझे मारना नहीं चाहती थी बल्कि उसने अपना एक हिस्सा मेरे अंदर हमेशा के लिए छोड़ दिया था और अब वो लौट आई है

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