सुनसान हाईवे की सच्ची भूतिया घटना | Real Horror Story
भाई आज जो सच्ची डरावनी कहानी मैं तुम्हें सुनाने जा रहा हूँ वो कोई बनावटी बात नहीं है बल्कि मेरे और मेरे सबसे पक्के दोस्त सुमित के साथ हाईवे पर घटी एक ऐसी खौफनाक सच्ची घटना है जिसे याद करके आज भी मेरे हाथ पैर सुन्न पड़ जाते हैं ये बात करीब तीन साल पुरानी है जब हम दोनों एक शादी अटेंड करके अपने शहर वापस लौट रहे थे और हमें रात बहुत ज्यादा हो गई थी सर्दियों के दिन
थे और हम बाइक पर थे हमने सोचा था कि जल्दी पहुंच जाएंगे लेकिन गांव से निकलते निकलते ही रात के ग्यारह बज गए थे और हमें उस पुराने वाले सुनसान हाईवे से होकर गुजरना था जिसके बारे में आस पास के लोग कई तरह की भूतिया कहानियां सुनाते थे लोग कहते थे कि उस हाईवे पर रात को सफर करना मौत को दावत देने जैसा है लेकिन हम जवान थे और खून गर्म था तो हमने किसी की बात
पर ध्यान नहीं दिया और अपनी बाइक उस घने जंगल के बीच से निकलने वाली सुनसान सड़क पर डाल दी जैसे ही हमने उस असली भूतिया हाईवे पर अपनी बाइक चढ़ाई मौसम एकदम से बदल गया शहर की तरफ जो थोड़ी बहुत गर्माहट थी वो अचानक से एक चुभने वाली बर्फ जैसी ठंड में बदल गई सड़क के दोनों तरफ बहुत ऊंचे ऊंचे और घने पेड़ थे जिनकी टहनियां आपस में उलझ कर सड़क के ऊपर एक गुफा जैसी बना
रही थीं चांद की रोशनी भी उन पेड़ों को पार करके नीचे नहीं आ पा रही थी और हमारी बाइक की पीली हेडलाइट उस घने अंधेरे को चीरने की नाकाम कोशिश कर रही थी मुझे पीछे बैठे हुए एक अजीब सी बेचैनी हो रही थी जैसे कोई लगातार हमें पेड़ों के पीछे से घूर रहा हो मैंने सुमित से कहा कि भाई थोड़ा तेज चला मुझे ये जगह कुछ ठीक नहीं लग रही है उसने भी बिना कुछ बोले बाइक
की स्पीड बढ़ा दी लेकिन अजीब बात ये थी कि इतनी स्पीड में भी बाइक के इंजन की आवाज के अलावा वहां कोई और आवाज नहीं थी ना हवा की ना किसी जानवर की एकदम मुर्दा सन्नाटा जो कानों में चुभ रहा था हम करीब बीस किलोमीटर ही आगे गए होंगे कि अचानक हवा में एक बहुत ही अजीब सी सड़ांध फैलने लगी ये बदबू मरे हुए जानवर की नहीं थी बल्कि ये ऐसी बदबू थी जैसे कोई बहुत पुरानी
चीज जमीन से उखाड़ दी गई हो मुझे उबकाई आने लगी और मैंने अपनी नाक पर रुमाल रख लिया मैंने सुमित के कंधे पर हाथ रखा और पूछा कि क्या उसे भी ये बदबू आ रही है लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया वो बस एकटक सामने देखते हुए बाइक चला रहा था उसकी गर्दन बिल्कुल अकड़ी हुई थी मुझे लगा शायद ठंड की वजह से वो ऐसा कर रहा है लेकिन तभी हमारी बाइक की हेडलाइट अपने आप भक
भक करके जलने बुझने लगी और इंजन अजीब सी आवाजें करने लगा ऐसा लग रहा था जैसे कोई भारी चीज हमारी बाइक के पीछे आकर बैठ गई हो और उसका वजन बाइक को पीछे की तरफ खींच रहा हो मैंने पलट कर पीछे देखा तो वो नजारा मेरी रूह कंपा देने वाला था पीछे सड़क पर घना अंधेरा था लेकिन उस अंधेरे में मुझे एक बहुत ही लंबी और विकृत सी परछाई हमारे पीछे पीछे भागती हुई दिखाई दी वो
परछाई इंसानी नहीं थी उसके हाथ बहुत लंबे थे और वो चार पैरों पर किसी जंगली जानवर की तरह दौड़ रही थी मेरा गला एकदम सूख गया और मेरे मुंह से आवाज तक नहीं निकली मैं बस सुमित की जैकेट को कसकर पकड़ कर बैठ गया मैंने पूरी ताकत से चिल्लाकर कहा कि सुमित बाइक और तेज भगा पीछे कुछ है लेकिन सुमित ने जैसे मेरी बात सुनी ही नहीं वो पहले से भी ज्यादा अजीब बर्ताव करने लगा था
उसने बाइक की स्पीड बढ़ाने के बजाय बिल्कुल धीमी कर दी और एकदम बीच सड़क पर बाइक खड़ी कर दी रात के बज रहे थे डेढ़ और हम उस भयानक सुनसान जंगल के बीचों बीच खड़े थे जहाँ दूर दूर तक कोई इंसान नहीं था सिर्फ वो खौफनाक अंधेरा और हम दो दोस्त बाइक रुकने के बाद सन्नाटा इतना गहरा हो गया था कि मुझे अपने ही दिल की धड़कनें हथौड़े की तरह सीने पर बजती हुई महसूस हो रही
थीं मैंने देखा कि सुमित के हाथ हैंडल पर बहुत बुरी तरह से जकड़े हुए थे उसकी उंगलियां सफेद पड़ गई थीं जैसे वो अपनी पूरी ताकत से उसे दबा रहा हो मैं उसे बार बार बुला रहा था कि भाई क्या हुआ तुझे क्या दिख रहा है लेकिन वो एकदम पत्थर की मूरत बन चुका था तभी मुझे महसूस हुआ कि जंगल के अंदर से किसी के रोने की आवाज आ रही है वो रोने की आवाज किसी औरत
की थी जो बहुत दर्द में चीख रही थी लेकिन वो चीख इंसानी कानों को फाड़ देने वाली थी मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दिमाग सुन्न हो गया है और कोई मेरे अंदर के सारे खौफ को खींच कर बाहर निकाल रहा है वो डर इतना असली था कि मेरे पैर कांपने लगे और मैं चाह कर भी वहां से भाग नहीं पा रहा था मुझे समझ आ गया था कि ये जो भी चीज है ये हमारे दिमाग के
साथ एक बहुत ही भयानक खेल खेल रही है मैंने सुमित को कंधे से पकड़कर झकझोरा और गालियां देते हुए कहा कि तू पागल हो गया है क्या यहाँ बाइक क्यों रोक दी लेकिन वो कुछ नहीं बोला वो बस वैसे ही बाइक पर बैठा रहा उसकी पीठ मेरी तरफ थी अचानक वो बहुत ही धीमी और अजीब सी आवाज में हंसने लगा वो हंसी सुमित की नहीं थी वो इतनी भारी और खुरदरी आवाज थी जैसे किसी का गला
कटा हुआ हो और वो हंसने की कोशिश कर रहा हो मुझे अब पक्का यकीन हो गया था कि ये कोई नॉर्मल बात नहीं है बल्कि एक असली भूतिया घटना हमारे साथ घट रही है मैं डर के मारे बाइक से नीचे उतर गया और पीछे की तरफ खिसकने लगा तभी सुमित ने अपनी गर्दन मेरी तरफ घुमाई लेकिन उसका शरीर अभी भी सामने की तरफ ही था उसकी गर्दन एक ऐसे एंगल पर घूम गई थी जो किसी भी
इंसान के लिए नामुमकिन है उसकी आंखें पूरी तरह से सफेद हो चुकी थीं और उसके चेहरे पर एक बहुत ही भयानक और डरावनी मुस्कान थी उसने मुझे मेरे नाम से पुकारा लेकिन उस आवाज में सुमित कहीं नहीं था वो कोई और ही शैतानी ताकत थी जो मेरे दोस्त के शरीर पर पूरी तरह से हावी हो चुकी थी और वो मेरी तरफ घूरते हुए अपनी जगह से धीरे धीरे उठने लगा और मुझे लगा जैसे मेरे शरीर का
सारा खून जम गया है सुमित का शरीर बहुत अजीब तरीके से हिल रहा था जैसे उसके हाथ पैर उसके कंट्रोल में ना हों बल्कि कोई और उसे कठपुतली की तरह नचा रहा हो वो बाइक से नीचे उतरा लेकिन उसके पैर जमीन पर बहुत भारी पड़ रहे थे एक अजीब सी खट खट की आवाज आ रही थी जैसे उसकी हड्डियां आपस में टकरा रही हों मैं पीछे हटता जा रहा था और तभी उसने कुछ ऐसा कहा जिसने
मेरे दिमाग की नसें फाड़ दीं उसने मेरी एक ऐसी पुरानी गलती के बारे में बात की जो मेरे और भगवान के अलावा कोई नहीं जानता था वो मेरी वो कमजोरी थी जिसे सोचकर मैं आज भी डरता हूँ और वो शैतानी ताकत मेरे उसी डर का फायदा उठाकर मुझे अंदर से तोड़ रही थी मुझे समझ आ गया था कि ये असली भूतिया खेल है जहाँ कोई मेरे दिमाग से खेल रहा है मैं बस भगवान का नाम जपने
लगा लेकिन मेरे होंठ कांप रहे थे और आवाज नहीं निकल रही थी सुमित ने मेरी तरफ अपने दोनों हाथ बढ़ाए और एक ऐसी रूह कंपा देने वाली कहानी शुरू कर दी जो किसी और जन्म की लग रही थी वो बता रहा था कि कैसे इस भूतिया हाईवे पर सालों पहले किसी को तड़पा तड़पा कर मारा गया था और अब वो आत्माएं यहाँ से गुजरने वालों को अपना शिकार बनाती हैं उसकी आवाज में दर्द और गुस्सा दोनों
था लेकिन सबसे डरावनी बात ये थी कि बोलते बोलते वो अचानक से उल्टे कदमों चलने लगा हाँ उसका शरीर सामने जंगल की तरफ था लेकिन उसकी गर्दन पूरी तरह से पीछे मेरी तरफ घूमी हुई थी और वो लगातार मुझे देखते हुए जंगल के उस घने अंधेरे में उल्टे पैर जा रहा था मेरा दोस्त मेरी आंखों के सामने मौत के मुंह में जा रहा था और मैं डर के मारे कुछ नहीं कर पा रहा था लेकिन फिर
मेरे अंदर पता नहीं कहाँ से एक हिम्मत आई और मैं सुमित की तरफ भागा मैंने पीछे से उसकी जैकेट को कसकर पकड़ लिया और चिल्लाया कि रुक जा भाई कहाँ जा रहा है लेकिन जैसे ही मैंने उसे छुआ मुझे ऐसा लगा जैसे मैंने बर्फ की किसी सिल्ली को पकड़ लिया हो उसका शरीर इतना ठंडा था कि मेरी उंगलियां सुन्न पड़ गईं उसने बिना मेरी तरफ देखे अपने हाथ को झटके से पीछे किया और मुझमें इतनी जोर
की धक्का लगा कि मैं हवा में उछलकर दूर पक्की सड़क पर जा गिरा मेरी कोहनी और घुटनों से खून बहने लगा और दर्द के मारे मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया जब मैंने थोड़ी हिम्मत जुटाकर अपनी आंखें खोलीं तो सुमित वहां नहीं था वो उस खौफनाक जंगल के अंधेरे में पूरी तरह से गायब हो चुका था मैं सड़क पर अकेला पड़ा था और चारों तरफ एक ऐसा डरावना सन्नाटा था जो कान के पर्दों को चीर
रहा था मेरी बाइक जो अब तक चालू थी उसका इंजन अचानक से बंद हो गया और जो इकलौती पीली रोशनी वहां थी वो भी बुझ गई अब वहां इतना घुप्प अंधेरा था कि मुझे अपना हाथ तक नहीं दिखाई दे रहा था मैं सड़क पर पेट के बल पड़ा हुआ था और मेरी सांसें बहुत भारी हो गई थीं ये कोई पैरानॉर्मल एक्टिविटी नहीं थी बल्कि साक्षात मौत मेरे सामने खड़ी थी तभी मुझे अपने बिल्कुल पास से कुछ
आवाजें आने लगीं वो आवाजें ऐसी थीं जैसे कोई नंगे पैर पक्की सड़क पर चल रहा हो छप छप छप की बहुत ही धीमी आवाज जो धीरे धीरे मेरे पास आ रही थी मैंने अपनी आंखें पूरी तरह से खोल लीं लेकिन अंधेरे में कुछ नहीं दिखा तभी मुझे महसूस हुआ कि कोई मेरे ठीक ऊपर झुका हुआ है क्योंकि एक बहुत ही सड़ी हुई बदबूदार हवा मेरे चेहरे पर पड़ रही थी मुझे सांस लेने में तकलीफ होने लगी
मैं उठकर भागना चाहता था लेकिन मेरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया था मुझे वो डरावनी सच्ची घटना याद आने लगी जो लोग इस हाईवे के बारे में बताते थे कि जो भी यहाँ रुकता है वो कभी वापस नहीं जाता तभी किसी ने मेरे कानों के बिल्कुल पास फुसफुसाते हुए मेरा नाम लिया आवाज बिल्कुल सुमित की थी लेकिन मुझे पता था कि वो मेरा दोस्त नहीं है वो कोई और था जो अब मेरे खून का
प्यासा था और मेरी तरफ अपने ठंडे हाथ बढ़ा रहा था मुझे लगा कि अब मेरी जिंदगी का ये आखिरी पल है वो ठंडे हाथ मेरी गर्दन की तरफ बढ़ रहे थे और उस सुमित जैसी आवाज में कोई मुझे कह रहा था कि तू भी यहीं रह जा हमारे साथ इस भूतिया हाईवे पर हमेशा के लिए मेरा पूरा शरीर सुन्न था लेकिन मौत को इतने करीब देखकर पता नहीं मेरे अंदर कहाँ से जान आ गई मैंने अपनी
पूरी ताकत से अपने पैर को मोड़ा और हवा में जोर से लात चलाई मेरी लात किसी ठोस चीज पर नहीं लगी बल्कि ऐसा लगा जैसे मैंने किसी ठंडे पानी के गुब्बारे पर लात मारी हो एक बहुत ही भयानक और कान फाड़ देने वाली चीख गूंजी और वो सड़ी हुई बदबू वाला साया मेरे ऊपर से हट गया मैं एक झटके में उठ खड़ा हुआ मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था लेकिन मैंने अपनी मोटरसाइकिल को टटोलना शुरू
किया मेरी किस्मत अच्छी थी कि चाबी उसी में लगी हुई थी और वो स्टार्ट होने के लिए तैयार थी मैंने पागलों की तरह किक मारी और सामने की पीली रोशनी जल उठी उस पीली रोशनी में मैंने जो नजारा देखा वो किसी भी इंसान को हमेशा के लिए पागल करने के लिए काफी था मेरी मोटरसाइकिल से कुछ ही दूरी पर जंगल के किनारे सुमित खड़ा था लेकिन वो दो पैरों पर नहीं बल्कि चारों हाथ पैरों के बल
किसी जानवर की तरह बैठा हुआ था और मुझे ही घूर रहा था उसकी आंखें रोशनी में किसी जंगली जानवर की तरह लाल चमक रही थीं और उसके मुंह से लार टपक रही थी सबसे खौफनाक बात ये थी कि कड़कड़ाती ठंड में भी उसके पैरों में जूते नहीं थे वो बिल्कुल नंगे पैर था और उसके पैर बहुत ही अजीब तरीके से पीछे की तरफ मुड़े हुए थे मुझे उसे वहीं छोड़कर भाग जाने का खयाल आया लेकिन वो
मेरा सबसे पक्का दोस्त था और मैं उसे इस रूह कंपा देने वाली कहानी का हिस्सा नहीं बनने दे सकता था मैंने अपनी जेब से एक छोटी सी धार्मिक किताब निकाली जो मेरी मां ने मुझे हमेशा साथ रखने को दी थी मैं उस किताब को हाथ में लेकर सुमित की तरफ दौड़ा और चिल्लाया कि सुमित उठ जा भाई हमें यहाँ से निकलना है जैसे ही मैं उसके करीब पहुंचा उसने मेरे ऊपर छलांग लगा दी उसका वजन इतना
ज्यादा लग रहा था जैसे कोई भारी पत्थर मेरे ऊपर गिर गया हो हम दोनों पक्की सड़क पर गिर पड़े और वो मेरे गले को अपने दांतों से काटने की कोशिश करने लगा मैं उसे रोकने की पूरी कोशिश कर रहा था लेकिन उसमें इतनी ताकत थी जो किसी इंसान में नहीं हो सकती थी मैंने वो किताब सीधे उसके माथे पर लगा दी और पूरी ताकत से दबा दी किताब उसके माथे पर लगते ही सुमित ऐसे तड़पने लगा
जैसे उसे किसी ने आग पर रख दिया हो वो अजीब सी औरतों वाली आवाज में चीखने लगा और उसका शरीर पीछे की तरफ मुड़ने लगा मैंने इस मौके का फायदा उठाया और उसे कॉलर से खींच कर मोटरसाइकिल की तरफ लाया मैंने उसे जैसे तैसे पीछे की सीट पर पटका और खुद आगे बैठकर पूरी रफ्तार से गाड़ी दौड़ा दी मुझे नहीं पता कि मैं कितनी तेज रफ्तार में गाड़ी चला रहा था हवा मेरे कानों में भयानक आवाजें
कर रही थी और पीछे बैठा सुमित अब एकदम शांत था वो ना कुछ बोल रहा था और ना ही हिल डुल रहा था मुझे डर लग रहा था कि कहीं वो मर तो नहीं गया लेकिन उस सुनसान सड़क पर रुकना मौत को दावत देना था वो रास्ता खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा था ऐसा लग रहा था जैसे हम गोल गोल घूम रहे हैं और वो जंगल हमारा पीछा कर रहा है मैं बस आगे
बढ़ता रहा जब तक कि मुझे दूर एक छोटे से ढाबे की रोशनी नहीं दिखाई दी ढाबे को देखते ही मेरी जान में जान आई और मैंने वहां जाकर सीधा ब्रेक मारा ढाबे पर कुछ लोग आग सेंक रहे थे हमारी हालत देखकर वो लोग तुरंत हमारे पास आ गए मैंने सुमित को नीचे उतारा वो बेहोश था और उसका पूरा शरीर बर्फ की तरह ठंडा था ढाबे वाले बूढ़े आदमी ने उसे आग के पास लिटाया और कहा कि
बेटा तुम लोग बहुत खुशकिस्मत हो जो उस असली भूतिया घटना से जिंदा बचकर आ गए वहां से तो आज तक कोई भी सलामत वापस नहीं आया है कुछ देर बाद सुमित को होश आ गया उसने अपनी आंखें खोलीं और मुझे देखकर रोने लगा उसने कहा कि उसे कुछ याद नहीं है कि हम जंगल में क्यों रुके थे और उसके साथ क्या हुआ था बस उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत गहरे अंधेरे में कैद था
मुझे लगा कि चलो जो भी हुआ वो बुरा सपना समझ कर भूल जाएंगे हम सुबह होने का इंतजार करते रहे और सूरज निकलते ही वहां से अपने शहर की तरफ निकल पड़े घर पहुंचकर मैंने सुमित को उसके घर छोड़ दिया और अपने घर आ गया मुझे लगा था कि ये डरावनी सच्ची घटना यहीं खत्म हो गई है और हम उस शैतानी साये को उसी जंगल में छोड़ आए हैं लेकिन मैं गलत था बहुत गलत ये हॉरर
स्टोरी अभी खत्म नहीं हुई थी इस बात को आज तीन साल हो चुके हैं सुमित अपनी आम जिंदगी जी रहा है वो दफ्तर जाता है सबसे बात करता है और बिल्कुल ठीक लगता है लेकिन उसके परिवार वाले बताते हैं कि हर महीने की अमावस्या की रात को सुमित के कमरे से अजीब सी आवाजें आती हैं जैसे कोई कमरे में नंगे पैर चल रहा हो छप छप छप की वो वही खौफनाक आवाज है जो मैंने उस रात
उस सुनसान सड़क पर सुनी थी सबसे ज्यादा डराने वाली बात ये है कि सुमित की मां ने उसे कई बार रात के अंधेरे में कमरे के एक कोने में खड़े होकर दीवार को घूरते हुए देखा है और जब वो उसे बुलाती हैं तो वो बिल्कुल उसी डरावनी और भारी औरतों वाली आवाज में जवाब देता है कि मैं सुमित नहीं हूँ हम अभी भी उसी जंगल में हैं मुझे अब ये समझ नहीं आता कि जो मेरे साथ
लौट कर आया वो मेरा दोस्त सुमित है या हम उस रात उस भयानक जगह से कभी वापस आ ही नहीं पाए और ये सब सिर्फ मेरा दिमाग मेरे साथ खेल रहा है
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