Post-Mortem मुर्दाघर की रात Hindi Horror Story
मुर्दाघर की रात: शहर के बाहरी इलाके में स्थित सयाजीराव मेमोरियल अस्पताल की इमारत दिन में जितनी व्यस्त और शोर-शराबे वाली दिखती थी, सूरज ढलते ही उतनी ही मनहूस और खामोश हो जाती थी। लेकिन इस विशाल इमारत का सबसे डरावना हिस्सा इसके सबसे नीचे, बेसमेंट के आखिरी कोने में था— 'मर्च्युरी' यानी मुर्दाघर। अयान, जिसने हाल ही में अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की थी, आज उसकी वहां पहली नाइट ड्यूटी थी। जब उसे सीनियर डॉक्टर ने बताया कि उसे रात भर मुर्दाघर की निगरानी और कुछ कागजी काम पूरे करने हैं, तो अयान के चेहरे पर एक फीकी मुस्कान आ गई। वह खुद को आधुनिक और तार्किक सोच
वाला मानता था, जिसके लिए भूत-प्रेत सिर्फ पुरानी कहानियों का हिस्सा थे। रात के ठीक 11 बजे थे। जब अयान भारी लोहे के दरवाजे को धकेलकर अंदर दाखिल हुआ, तो एक अजीब सी बर्फीली ठंडी हवा ने उसका स्वागत किया। वहां की हवा में फॉर्मल्डिहाइड और सड़ने की एक हल्की सी दुर्गंध घुली हुई थी, जो फेफड़ों में जाते ही मन को भारी कर देती थी। मर्च्युरी के उस हॉल में सफेद रोशनी वाली ट्यूबलाइट्स रुक-रुक कर झपक रही थीं, जिससे दीवार पर बनी परछाइयां बार-बार छोटी-बड़ी हो रही थीं। हॉल के दोनों तरफ स्टील के फ्रीजर लगे थे, जिनमें नंबर लिखे हुए थे। हर नंबर के पीछे एक कहानी
दफन थी, एक ऐसी जिंदगी जो अब खत्म हो चुकी थी। अयान अपने केबिन में बैठा, जो फ्रीजर वाले हॉल के ठीक बगल में था। केबिन और हॉल के बीच एक कांच की खिड़की थी। उसने मेज पर रखे पुराने रजिस्टर को खोला और पेन उठाया। हॉल में सन्नाटा इतना गहरा था कि अयान को अपनी ही सांसें साफ सुनाई दे रही थीं। अचानक, उसे एक आवाज़ सुनाई दी। च्रर्रर्र... जैसे किसी ने स्टील की मेज पर कोई नुकीली चीज़ घिसी हो। अयान के हाथ एक पल के लिए रुक गए। उसने केबिन की खिड़की से बाहर झांका। हॉल खाली था। स्टील की स्ट्रेचर अपनी जगह पर थीं। उसने सोचा,
"पुराना अस्पताल है, पाइपों में हवा की आवाज़ होगी।" उसने फिर से लिखना शुरू किया, तभी उसे महसूस हुआ कि केबिन का तापमान अचानक गिर गया है। उसकी सांसें भाप बनकर हवा में दिखने लगीं। उसी वक्त, हॉल की एक ट्यूबलाइट ज़ोर से कड़की और बुझ गई। अब हॉल में आधा अंधेरा छा चुका था। तभी अयान की नज़र फ्रीजर नंबर '17' पर पड़ी। उस फ्रीजर का हैंडल धीरे-धीरे हिल रहा था। अयान की धड़कनें तेज होने लगीं। उसने रजिस्टर बंद किया और कांपते कदमों से केबिन के बाहर निकला। जैसे ही उसने हॉल में कदम रखा, उसे महसूस हुआ कि कोई उसे देख रहा है। वह सड़न की बदबू
अब और भी तेज हो गई थी। वह फ्रीजर नंबर 17 के पास पहुँचा। उसने हैंडल को छुआ, वह बर्फ जैसा ठंडा था। जैसे ही उसने उसे कसकर बंद करने की कोशिश की, उसे फ्रीजर के अंदर से एक धीमी फुसफुसाहट सुनाई दी। "बाहर निकालो... बहुत ठंड है यहाँ..." अयान के रोंगटे खड़े हो गए। उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई। "नहीं, ये मेरा भ्रम है। मुर्दे बात नहीं करते," उसने खुद को समझाया। लेकिन तभी फ्रीजर नंबर 17 का दरवाज़ा अपने आप एक झटके के साथ बाहर की तरफ खुला। अयान दो कदम पीछे गिर पड़ा। फ्रीजर के अंदर से एक सफेद कपड़े में लिपटी लाश धीरे-धीरे बाहर की
तरफ खिसकने लगी। वह कपड़ा खून से लथपथ था। लाश का चेहरा ढका हुआ था, लेकिन कपड़े के ऊपर से उभरी हुई नाक और जबड़े की हड्डी साफ दिख रही थी। अयान की चीख गले में ही फंस गई। उसने देखा कि लाश के हाथ, जो सफेद कपड़े से बाहर निकले हुए थे, काले पड़ चुके थे और उनके नाखून असामान्य रूप से लंबे और तीखे थे। उन नाखूनों ने फ्रीजर के किनारों को पकड़ लिया था। तभी मर्च्युरी की बाकी लाइटें भी टिमटिमाने लगीं। हॉल के दूसरे कोने से भी आवाज़ें आने लगीं। फ्रीजर नंबर 24, 32, और 09... सबके हैंडल एक साथ हिलने लगे। ऐसा लग रहा था
जैसे पूरे मुर्दाघर के मुर्दे एक साथ जाग रहे हों। अयान उठकर केबिन की तरफ भागा, लेकिन तभी उसे अहसास हुआ कि केबिन के अंदर कोई खड़ा है। कांच के पीछे एक साया था, जो बिल्कुल अयान की तरह दिख रहा था, लेकिन उसकी आँखें पूरी तरह काली थीं और वह मुस्कुरा रहा था। अयान बीच हॉल में जम गया। पीछे से फ्रीजर नंबर 17 की वह लाश अब पूरी तरह बाहर आ चुकी थी और फर्श पर गिर गई थी। फर्श पर गिरने के बाद वह लाश इंसानों की तरह नहीं चली, बल्कि एक मकड़ी की तरह अजीब कोणों पर हाथ-पैर मोड़कर अयान की तरफ रेंगने लगी। उस लाश
के गले से एक घुरघराहट भरी आवाज़ निकल रही थी, "आज... एक नई जगह खाली है... केबिन में तुम्हारी मेज सजी है डॉक्टर..." अयान ने पीछे मुड़कर देखा, वह लाश अब उसके पैरों के पास थी। उसने अपने ठंडे, सड़े हुए हाथ से अयान का टखना पकड़ लिया। अयान ने अपनी पूरी ताकत लगाकर उसे लात मारी और मुख्य दरवाजे की तरफ भागा। लेकिन दरवाज़ा, जो कुछ देर पहले आसानी से खुल गया था, अब ऐसा लग रहा था जैसे उसे बाहर से वेल्ड कर दिया गया हो। उसने हैंडल को पागलों की तरह झकझोरा, लेकिन वह टस से मस नहीं हुआ। तभी हॉल की आख़िरी लाइट भी बुझ गई।
अब वहां सिर्फ घुप अंधेरा था। अयान को उस अंधेरे में कई लोगों के रेंगने की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। स्टील की मेजों के खिसकने और ठंडे हाथों के फर्श पर रगड़ने की आवाज़ें। अचानक, उसके कान के पास एक बर्फीली सांस महसूस हुई और किसी ने धीमे से कहा— "हमारी दुनिया में आपका स्वागत है, डॉक्टर अयान। यहाँ रात कभी खत्म नहीं होती।" अंधेरा इतना घना था कि अयान को अपना हाथ भी दिखाई नहीं दे रहा था। बस सुनाई दे रही थी तो वह घुरघराहट—जैसे सूखी हड्डियों को आपस में रगड़ा जा रहा हो। अयान का दिल सीने को चीरकर बाहर आने को बेताब था। वह भारी
लोहे के दरवाजे से पीठ सटाकर नीचे की तरफ खिसक गया। उसके हाथ ठंडे फर्श पर टिके थे, जहाँ उसे एक अजीब सी चिपचिपाहट महसूस हुई। वह पसीना नहीं था, वह खून की एक ताज़ा और पतली लकीर थी जो किसी फ्रीजर से बहकर उसके जूतों तक पहुँच रही थी। अचानक, केबिन की वह इकलौती मेज वाली लाइट जली। लेकिन उसकी रोशनी सफेद नहीं, बल्कि गहरे लाल रंग की थी। उस लाल धुंधली रोशनी में अयान ने जो देखा, उसे देखकर उसकी चीख भी गले में दम तोड़ गई। पूरा मर्च्युरी हॉल अब बदल चुका था। स्टील की जो स्ट्रेचर खाली थीं, उन पर अब कटी-फटी लाशें बैठी हुई थीं।
कोई अपनी गर्दन को 180 डिग्री मोड़कर उसे देख रहा था, तो कोई अपने पेट से बाहर निकली अंतड़ियों को वापस अंदर ठूंसने की नाकाम कोशिश कर रहा था। उनकी आँखें सफेद पत्थर की तरह बेजान थीं, लेकिन उनमें अयान के लिए एक भूख साफ झलक रही थी। तभी अयान ने देखा कि फ्रीजर नंबर 17 वाली वह मकड़ी जैसी रेंगने वाली लाश अब दीवारों पर चढ़ रही थी। वह छत से उल्टी लटकी हुई थी, उसके लंबे काले नाखून छत के प्लास्टर को खुरच रहे थे। अयान ने अपनी पूरी हिम्मत जुटाई और रेंगते हुए उस केबिन की तरफ बढ़ने की कोशिश की, क्योंकि उसे याद आया कि केबिन
की दराज में एक इमरजेंसी टॉर्च और अलार्म का बटन है। जैसे ही वह बीच हॉल तक पहुँचा, एक लाश जो स्ट्रेचर पर लेटी थी, अचानक उठ बैठी और उसने अयान का कॉलर पकड़ लिया। उस मुर्दे का आधा चेहरा जल चुका था और दांत बाहर निकले हुए थे। उसने अपनी सड़ी हुई जुबान बाहर निकाली और अयान के कान के पास फुसफुसाया— "डॉक्टर... तुमने कल मेरी डेथ रिपोर्ट पर साइन किया था न? तुमने लिखा था— 'कार्डियक अरेस्ट'। लेकिन मैं तो अभी भी धड़क रहा हूँ... महसूस करना चाहोगे?" उसने अयान का हाथ पकड़कर अपने खुले हुए सीने की तरफ ले जाने की कोशिश की। अयान ने अपनी पूरी
जान लगाकर उसे धक्का दिया और भागकर केबिन के अंदर घुस गया। उसने अंदर से कुंडी चढ़ा ली। केबिन के कांच पर बाहर से दर्जनों हाथ पड़ने लगे। थप... थप... थप... वह आवाज़ ऐसी थी जैसे बारिश की बूंदें गिर रही हों, लेकिन ये बूंदें मांस और सड़न की थीं। अयान ने पागलों की तरह मेज की दराज खोली। उसे टॉर्च मिल गई। उसने बटन दबाया, लेकिन रोशनी नहीं निकली। उसने उसे मेज पर पटका और फिर से दबाया। इस बार रोशनी निकली, लेकिन वह रोशनी सीधी नहीं थी। टॉर्च की बीम जिस भी कोने में पड़ रही थी, वहां उसे कुछ और ही दिख रहा था। जब उसने टॉर्च
का घेरा केबिन के कोने में घुमाया, तो उसने देखा कि वहां एक छोटी बच्ची खड़ी थी। उसके हाथ में एक गुड़िया थी, लेकिन उस गुड़िया की जगह उसने एक कटा हुआ इंसान का हाथ पकड़ रखा था। बच्ची ने अयान की तरफ देखा और रोने लगी। उसके रोने की आवाज़ इंसानों जैसी नहीं थी, बल्कि लोमड़ी के रोने जैसी तीखी और डरावनी थी। "अंकल... मुझे ठंड लग रही है... क्या मैं आपकी खाल पहन लूं?" बच्ची ने धीमे से कहा और एक झटके में अयान के करीब आ गई। अयान पीछे हटा और खिड़की के कांच से जा टकराया। बाहर खड़ी लाशों ने कांच को तोड़ना शुरू कर दिया
था। तड़ाक! कांच का एक बड़ा टुकड़ा अयान के कंधे में जा घुसा। दर्द की एक लहर उसके शरीर में दौड़ गई, लेकिन उसे एहसास हुआ कि यह दर्द असली है, मतलब यह कोई सपना नहीं था। तभी उसे केबिन की मेज पर रखे उस रजिस्टर पर अपनी नज़र पड़ी। रजिस्टर के पन्ने अपने आप पलट रहे थे। पन्ने जाकर रुके आज की तारीख पर। अयान की आँखें फटी की फटी रह गईं। रजिस्टर में सबसे नीचे वाले कॉलम में उसका अपना नाम लिखा था— 'डॉक्टर अयान'। समय लिखा था— 'रात 2:14 बजे'। और मौत का कारण लिखा था— 'अज्ञात डर'। अयान ने अपनी घड़ी देखी। 2 बजकर 13 मिनट
और 50 सेकंड हो रहे थे। उसके पास सिर्फ 10 सेकंड थे। केबिन का दरवाजा एक झटके में टूट गया। वह छत पर लटकी लाश सीधे अयान के ऊपर गिरी। उसके ठंडे नाखून अयान के गले की खाल में धंसने लगे। अयान ने टॉर्च से उसके चेहरे पर वार किया, जिससे वह लाश नीचे गिरी, लेकिन तब तक बाकी मुर्दे भी केबिन के अंदर घुस चुके थे। अयान खिड़की के टूटे हुए हिस्से से बाहर की तरफ कूदा। वह गलियारे में भागने लगा, लेकिन वह गलियारा खत्म ही नहीं हो रहा था। उसे लगा कि वह भाग रहा है, लेकिन असल में वह उसी हॉल में गोल-गोल घूम रहा था।
चारों तरफ से आती उन सड़ी हुई आवाजों ने उसे घेर लिया था। तभी उसे सामने एक रोशनी दिखाई दी। मर्च्युरी का मुख्य दरवाजा! वह खुला हुआ था। बाहर से ठंडी और ताज़ा हवा अंदर आ रही थी। अयान ने अपनी आखिरी ताकत बटोरी और उस दरवाजे की तरफ छलांग लगा दी। जैसे ही उसने दहलीज पार की, सब कुछ शांत हो गया। अयान हाँफते हुए फर्श पर गिर गया। वह गलियारे की लाइटों में पहुँच चुका था। उसने पीछे मुड़कर देखा, मर्च्युरी का दरवाजा बंद था। सब कुछ सामान्य लग रहा था। कोई आवाज़ नहीं, कोई सड़न नहीं। उसने राहत की सांस ली और उठने की कोशिश की। लेकिन
तभी उसने अपने हाथ की तरफ देखा। उसके नाखून काले पड़ चुके थे और असामान्य रूप से लंबे हो गए थे। उसने अपने सीने पर हाथ रखा... वहां कोई धड़कन नहीं थी। उसे गलियारे के दूसरी तरफ से किसी के आने की आहट सुनाई दी। अस्पताल का गार्ड राउंड पर था। गार्ड ने अयान की तरफ टॉर्च जलाई और चिल्लाया— "कौन है वहां?" अयान बोलना चाहता था, "मैं हूँ, डॉक्टर अयान।" लेकिन उसके गले से सिर्फ एक घुरघराहट निकली। उसे अब गार्ड के शरीर से आती ताज़ा खून की महक बहुत अच्छी लग रही थी। उसे भूख लग रही थी। तभी मर्च्युरी के दरवाजे के ऊपर लगे डिजिटल बोर्ड पर
लाइट चमकी। वहां लिखा था— 'मर्च्युरी फुल। नई लाश: नंबर 18 - डॉक्टर अयान।' गार्ड की टॉर्च की रोशनी अयान की आँखों पर पड़ी, लेकिन अयान को वह चुभ नहीं रही थी। उसे ताज्जुब हुआ कि उसकी आँखों की पुतलियाँ रोशनी में सुकड़ नहीं रही थीं। वह बस पत्थर की तरह जमी हुई थीं। गार्ड पास आया, उसके जूतों की आवाज़ फर्श पर गूँज रही थी— टप... टप... टप...। अयान को उस आवाज़ के साथ गार्ड की नसों में दौड़ते गरम खून की सरसराहट भी सुनाई दे रही थी। "डॉक्टर साहब? आप यहाँ ज़मीन पर क्या कर रहे हैं?" गार्ड ने घबराकर पूछा। उसने अयान का हाथ पकड़ने के लिए
हाथ बढ़ाया। जैसे ही गार्ड की उँगलियाँ अयान की ठंडी कलाई से छुईं, गार्ड बिजली के झटके की तरह पीछे हटा। "बाप रे! आप इतने ठंडे... आपका शरीर तो बर्फ जैसा है!" गार्ड के चेहरे पर दहशत साफ़ दिख रही थी। अयान ने कुछ बोलने के लिए मुँह खोला, लेकिन शब्द नहीं निकले। उसके फेफड़ों में हवा ही नहीं थी कि वह आवाज़ पैदा कर सके। उसके गले से सिर्फ एक खोखली खरखराहट निकली, जैसे किसी पुरानी मशीन के पुर्जे आपस में रगड़ रहे हों। अयान ने अपनी हथेली देखी। उसकी खाल अब धीरे-धीरे धूसर (Grey) पड़ती जा रही थी। उसे अहसास हुआ कि अगर उसने अभी कुछ नहीं किया,
तो वह पूरी तरह से 'उन' जैसा बन जाएगा। उसने अपनी पूरी आत्मशक्ति बटोरी और अपनी उँगली के बढ़ते हुए काले नाखून को अपने ही दूसरे हाथ की हथेली में गाड़ दिया। अजीब बात थी। उसे दर्द नहीं हुआ, लेकिन उस घाव से खून भी नहीं निकला। बस एक गाढ़ा, काला और बदबूदार तरल पदार्थ बाहर आया। अयान के दिमाग में एक बिजली सी कौंधी। उसे याद आया कि मेडिकल कॉलेज में उसने एक बार 'सस्पेंडेड एनिमेशन' और 'कैटलेप्सी' के बारे में पढ़ा था, जहाँ इंसान मरा हुआ लगता है पर उसका दिमाग सक्रिय रहता है। लेकिन यह उससे कहीं ज़्यादा बुरा था। यह कोई बीमारी नहीं, एक श्राप था
जो इस मुर्दाघर की दीवारों में कैद था। तभी मर्च्युरी का वह भारी लोहे का दरवाज़ा, जो अयान के पीछे बंद था, एक बार फिर धीरे-धीरे खुलने लगा। इस बार वहां से कोई आवाज़ नहीं आई, सिर्फ एक घना, काला धुआं बाहर निकलने लगा। वह धुआं ज़मीन पर रेंगते हुए गार्ड के पैरों की तरफ बढ़ रहा था। गार्ड डर के मारे पीछे की तरफ भागा, "यहाँ कुछ गलत है! मुझे बड़े डॉक्टर को बुलाना होगा!" वह मोड़ा और गलियारे के अंधेरे में ओझल हो गया। अयान अकेला रह गया। उसे लगा कि शायद वह बच सकता है, लेकिन तभी उसके कानों में वही बच्ची की आवाज़ गूँजी, जो केबिन
में उसे दिखी थी। "अंकल... आप कहीं नहीं जा सकते। आपने हमारा रजिस्टर साइन किया है।" अयान ने मुड़कर देखा। वह बच्ची अब अकेली नहीं थी। उसके पीछे दर्जनों साये खड़े थे। वे सब वही मुर्दे थे जिन्हें अयान ने अभी कुछ देर पहले देखा था। लेकिन अब वे डरावने नहीं लग रहे थे, वे दुखी और बेबस लग रहे थे। उनके चेहरों पर मांस नहीं था, सिर्फ सूखी खाल हड्डियों से चिपकी हुई थी। उनमें से एक साया आगे बढ़ा। यह एक बूढ़ा आदमी था, जिसके गले पर एक गहरा कट था। उसने अयान की तरफ हाथ बढ़ाया और कहा, "डॉक्टर... हमें मुक्ति चाहिए। इस मर्च्युरी के नीचे एक
और मर्च्युरी है... पुरानी, जिसे अस्पताल प्रशासन ने साठ साल पहले बंद कर दिया था। हम सब वहां दफन हैं। हमारी लाशें कभी बाहर नहीं निकलीं। हमारा रिकॉर्ड कभी दर्ज नहीं हुआ। जब तक कोई 'जिंदा' इंसान हमारे साथ वहां नहीं सोता, हम इस मर्च्युरी के कैदी बने रहेंगे।" अयान को अब समझ आया। वह रजिस्टर, वह नंबर 18, वह सब एक जाल था। उसे मरा हुआ घोषित करके वे अपनी अधूरी आत्माओं को इस दुनिया से मुक्त करना चाहते थे। अयान ने चिल्लाने की कोशिश की, "मैं तुम्हारी मदद कैसे कर सकता हूँ? मुझे मारो मत!" बूढ़े ने अपनी बिना पलकों वाली आँखों से अयान को देखा, "तुम्हें उस
पुरानी मर्च्युरी का रास्ता खोलना होगा। वह रास्ता तुम्हारे केबिन की अलमारी के पीछे है। वहां एक सीढ़ी नीचे जाती है। अगर तुम वहां जाकर उस पुराने 'डेथ रजिस्टर' को जला दोगे, तो हम सब आज़ाद हो जाएंगे... और तुम भी।" लेकिन तभी माहौल बदल गया। वे सब आत्माएं अचानक डरकर पीछे हटने लगीं। हवा और भी ज़्यादा बर्फीली हो गई। गलियारे की लाइटें फटने लगीं। अंधेरे के बीच से एक विशाल आकृति उभरने लगी। यह किसी इंसान की नहीं थी। यह सात फीट लंबा एक साया था, जिसके सिर पर सींग जैसे उभार थे और उसकी आँखें अंगारों की तरह दहक रही थीं। "वह आ गया..." बूढ़े ने कांपते
हुए कहा। "मुर्दाघर का रखवाला। वह किसी को आज़ाद नहीं होने देगा।" वह साया अयान की तरफ बढ़ा। उसके चलने से ज़मीन काँप रही थी। अयान को महसूस हुआ कि उसकी आत्मा उसके शरीर से बाहर खींची जा रही है। वह रखवाला नहीं चाहता था कि अयान रजिस्टर जलाए। वह चाहता था कि अयान हमेशा के लिए नंबर 18 बनकर उसी स्टील के फ्रीजर में कैद रहे। अयान के पास अब कोई रास्ता नहीं था। उसे वापस उसी नरक (मर्च्युरी) के अंदर जाना था जहाँ से वह अभी जान बचाकर भागा था। उसने अपनी जेब में हाथ डाला, उसे वही टूटी हुई टॉर्च मिल गई। उसने उसे जोर से हिलाया।
एक हल्की सी रोशनी निकली। वह वापस मर्च्युरी के अंदर भागा। वह रखवाला उसके पीछे था। अयान केबिन के अंदर घुसा और उस भारी स्टील की अलमारी को धक्का देने लगा। उसकी ताकत अब इंसानों जैसी नहीं थी, वह किसी दानव जैसी हो गई थी। अलमारी एक तरफ खिसक गई और उसके पीछे एक छोटी सी लकड़ी की खिड़की नुमा दरवाज़ा दिखा। अयान ने उसे तोड़ा और नीचे की तरफ कूद गया। नीचे एक घुप्प अंधेरा तहखाना था। वहां की बदबू इतनी भयानक थी कि अयान को उबकाई आने लगी। वहां चारों तरफ इंसानी हड्डियाँ और पुराने कपड़े बिखरे पड़े थे। टॉर्च की रोशनी में उसे एक पुरानी लकड़ी की
मेज दिखी, जिस पर धूल से अटा हुआ एक मोटा लाल रजिस्टर रखा था। जैसे ही अयान ने उस रजिस्टर को छूने के लिए हाथ बढ़ाया, ऊपर से वह रखवाला नीचे कूद पड़ा। उसने अपनी भारी आवाज़ में दहाड़ मारी, "यह मेरा इलाका है! यहाँ सिर्फ मौत का राज चलता है!" रखवाले ने अपना भारी हाथ अयान की गर्दन पर रख दिया और उसे हवा में उठा लिया। अयान का दम घुटने लगा, हालाँकि उसे सांस की ज़रूरत नहीं थी, पर उसकी आत्मा को ऐसा लगा जैसे वह टुकड़े-टुकड़े हो रही हो। उसने अपनी जेब से लाइटर निकाला (जो वह हमेशा अपने पास रखता था)। उसने कांपते हाथों से लाइटर
जलाया और उसे उस पुराने, सूखे रजिस्टर की तरफ फेंका। आग की एक छोटी सी लौ रजिस्टर के पन्नों पर पड़ी। देखते ही देखते पूरा रजिस्टर धू-धू कर जलने लगा। एक भयानक चीख पूरे अस्पताल में गूँज उठी। वह चीख अयान की नहीं, उस रखवाले की थी। जैसे-जैसे रजिस्टर जल रहा था, वह रखवाला धुएं में बदलने लगा। उसके साथ ही वे सारी आत्माएं, जो ऊपर मर्च्युरी में कैद थीं, रोशनी के छोटे-छोटे गोलों में बदलकर गायब होने लगीं। अयान ने देखा कि उसकी अपनी खाल का रंग भी वापस सामान्य हो रहा है। उसके नाखून छोटे होने लगे। उसके सीने में एक धीमी सी हलचल हुई— धक... धक...। उसकी
धड़कन वापस आ रही थी। लेकिन तहखाने की आग अब फैल रही थी। उसे बाहर निकलना था। वह पागलों की तरह सीढ़ियों की तरफ बढ़ा। ऊपर पहुँचते ही उसने देखा कि मर्च्युरी का वह खौफनाक मंजर गायब हो चुका था। सब कुछ वैसा ही था जैसा रात 11 बजे था—शांत और ठंडा। सुबह के 6 बज रहे थे। सूरज की पहली किरण अस्पताल की खिड़की से छनकर अंदर आ रही थी। सीनियर डॉक्टर मर्च्युरी के अंदर दाखिल हुए। उन्होंने देखा कि अयान केबिन की ज़मीन पर बेहोश पड़ा है, उसके पास एक जली हुई पुरानी किताब के अवशेष थे। "अयान! अयान! जागो!" डॉक्टर ने उसे हिलाया। अयान ने अपनी आँखें
खोलीं। उसने डॉक्टर का चेहरा देखा और फिर अपनी कलाई। उसकी धड़कन अब सामान्य थी। उसने राहत की सांस ली। "क्या हुआ अयान? तुम यहाँ कैसे गिर गए? और ये कूड़ा-करकट यहाँ कैसे आया?" डॉक्टर ने अलमारी के पीछे वाले गड्ढे को देखते हुए पूछा। अयान खड़ा हुआ और मुस्कुराया, एक ऐसी मुस्कान जो बहुत गहरी थी। "कुछ नहीं सर... बस कुछ पुराने हिसाब-किताब बाकी थे, जिन्हें आज मैंने चुकता कर दिया।" अयान ने अपनी ड्यूटी खत्म की और अस्पताल से बाहर निकला। ताज़ा हवा में सांस लेते हुए उसने कसम खाई कि वह कभी वापस मुड़कर नहीं देखेगा। लेकिन जैसे ही वह अपनी बाइक के पास पहुँचा, उसने अपनी
शर्ट की जेब में हाथ डाला। वहां एक छोटा सा कागज़ का टुकड़ा था। उसने उसे खोलकर देखा। उस पर वही बच्ची की लिखावट में लिखा था— "शुक्रिया अंकल। लेकिन याद रखिएगा... मर्च्युरी में एक फ्रीजर हमेशा खाली रहता है... आपके लिए।" अयान के चेहरे से रंग उड़ गया। उसने मर्च्युरी की खिड़की की तरफ देखा। वहां से वह बच्ची उसे हाथ हिलाकर 'बाय' कह रही थी। - समाप्त -

Comments
Post a Comment