अनजान सवारी का मनहूस ताबीज - Real Horror Story

Cab ki seat par rakha darawna tabeez real horror story

 मेरा नाम रमेश है और मैं पिछले सात सालों से दिल्ली और एनसीआर में रात की शिफ्ट में कैब चला रहा हूँ। रात के अंधेरे में सड़क पर गाड़ी दौड़ाते हुए मैंने बहुत सी अजीब चीजें देखी हैं। शराबी देखे हैं झगड़े देखे हैं और कई बार सुनसान सड़कों पर कुछ ऐसा भी महसूस किया है जिसे शब्दों में बताना मुश्किल है। लेकिन आज मैं जो सच्ची डरावनी कहानी आपको बताने जा रहा हूँ वो कोई सुनी सुनाई बात नहीं है। ये एक ऐसी असली भूत की कहानी है जिसने मेरी पूरी जिंदगी तबाह करके रख दी। ये मेरे और


मेरी पत्नी सुनीता के साथ घटी एक ऐसी खौफनाक घटना है जिसे याद करके आज भी मेरी रूह कांप जाती है। अगर आप कोई हिंदी हॉरर स्टोरी पढ़ रहे हैं तो मैं आपको बता दूँ कि जो सच में होता है वो किसी भी मनगढ़ंत कहानी से हजार गुना ज्यादा भयानक होता है। बात पिछले साल सर्दियों की है। दिसंबर का महीना था और दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। रात के करीब दो बज रहे थे और धुंध इतनी ज्यादा थी कि सड़क पर दस कदम दूर का भी कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मेरी गाड़ी


का हीटर चल रहा था लेकिन फिर भी एक अजीब सी ठंड हड्डियों तक पहुंच रही थी। मैं गुड़गांव के एक बहुत ही सुनसान इलाके से अपनी कैब लेकर निकल रहा था। वहां आसपास कोई बस्ती नहीं थी बस दोनों तरफ बड़े बड़े और पुराने पेड़ थे। मेरा उस रात घर जाने का मन था क्योंकि सवारी मिल नहीं रही थी। तभी अचानक मेरी कैब की हेडलाइट की रोशनी में मुझे सड़क किनारे एक आदमी खड़ा दिखा। उस आदमी ने एक लंबा सा काला कोट पहना हुआ था और वो हाथ देकर गाड़ी रोक रहा था। सच बताऊँ तो उस


सुनसान जगह पर रात के दो बजे किसी को देखकर अंदर से एक अजीब सा डर लगा। मन किया कि गाड़ी भगा लूँ लेकिन फिर लगा कि शायद कोई मुसीबत में हो। मैंने गाड़ी उसके पास रोक दी। उसने बिना कुछ बोले गाड़ी का पीछे वाला दरवाजा खोला और अंदर बैठ गया। मैंने शीशे से पीछे देखा तो उसका चेहरा कोट के कॉलर और मफलर से ढका हुआ था। मैंने पूछा कि भाई साहब कहां जाना है। उसकी आवाज बहुत ही भारी और खुरदरी थी जैसे किसी का गला खराब हो। उसने बस इतना कहा कि आगे चौराहे तक छोड़


दो। रास्ते भर वो आदमी बिल्कुल चुपचाप बैठा रहा। कैब के अंदर एक अजीब सी बदबू फैलने लगी थी। वो बदबू वैसी थी जैसी कई दिनों से बंद पड़े किसी पुराने कमरे से आती है या सड़े हुए मांस की होती है। मेरा दम घुटने लगा था पर मैं किसी तरह जल्दी से उसे उतारना चाहता था। चौराहे पर पहुंचकर मैंने गाड़ी रोकी तो उसने मेरी तरफ कुछ पैसे बढ़ाए और बिना कुछ बोले गाड़ी से उतर कर अंधेरे में कहीं गायब हो गया। मैंने राहत की सांस ली और सीधे अपने घर की तरफ गाड़ी मोड़ ली। मेरा घर


पालम के पास एक छोटी सी कॉलोनी में था जहां मैं और मेरी पत्नी सुनीता रहते थे। घर पहुंचकर मैंने गाड़ी पार्क की और पीछे की सीट चेक करने लगा कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया। तभी मेरी नजर पीछे वाली सीट पर पड़ी। वहां एक अजीब सा ताबीज रखा हुआ था। वो ताबीज आम ताबीजों जैसा नहीं था। वो तांबे का बना हुआ था और काफी भारी था। उस पर कुछ अजीब से निशान और डिजाइन बने हुए थे जो मैंने पहले कभी नहीं देखे थे। मुझे समझ आ गया कि ये उसी सवारी का है जो अभी


उतरी थी। मैंने सोचा कि अब इतनी रात को उसे कहां ढूंढूंगा तो मैंने वो ताबीज उठा लिया और अपनी जेब में रख लिया। यही मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी और जानलेवा गलती थी। काश मैंने उस मनहूस चीज को वहीं फेंक दिया होता। मैं घर के अंदर गया तो सुनीता मेरे लिए जाग रही थी। उसने मुझे खाना दिया और मैं कपड़े बदलने लगा। कपड़े बदलते वक्त वो ताबीज मेरी जेब से निकलकर जमीन पर गिर गया। उसकी आवाज सुनकर सुनीता वहां आई और उसने वो ताबीज उठा लिया। उसे देखते ही सुनीता बोली कि अरे ये तो बड़ा


अजीब सा ताबीज है कहां से मिला। मैंने उसे सारी बात बता दी। सुनीता थोड़ी अंधविश्वासी थी और उसे पुरानी चीजों का शौक भी था। उसने कहा कि ये देखने में बहुत पुराना और किसी सिद्ध बाबा का लग रहा है मैं इसे पहन लेती हूँ क्या पता हमारे घर की बरकत बढ़ जाए। मैंने उसे मना किया कि किसी अनजान की चीज नहीं पहननी चाहिए लेकिन वो नहीं मानी और उसने एक काले धागे में डालकर वो ताबीज अपने गले में पहन लिया। उस रात हम दोनों सो गए। लेकिन असली खौफ का खेल उस रात से ही शुरू


हुआ। रात के करीब साढ़े तीन बज रहे होंगे। मेरी नींद अचानक से टूट गई। मुझे ऐसा लगा जैसे कमरे का तापमान बहुत ज्यादा गिर गया है। मैंने रजाई खींची और करवट ली तो मेरा हाथ सुनीता की तरफ गया। वो अपनी जगह पर नहीं थी। मैंने आंखें खोली तो कमरे में घुप्प अंधेरा था। मैंने आवाज दी सुनीता कहां हो। कोई जवाब नहीं आया। मैंने अपने फोन की टॉर्च जलाई और कमरे में रोशनी की। जो नजारा मैंने देखा उसने मेरे शरीर का सारा खून सुखा दिया। सुनीता कमरे के एक कोने में दीवार की तरफ मुंह करके खड़ी


थी। वो बिल्कुल सीधी खड़ी थी जैसे कोई पुतला हो। मैंने डरते हुए उसे फिर से आवाज दी और पूछा कि तुम वहां क्या कर रही हो। अचानक उसका शरीर एक अजीब तरीके से कांपा। उसकी गर्दन धीरे धीरे मेरी तरफ घूमने लगी। जब उसका चेहरा मेरी तरफ आया तो मेरे मुंह से चीख निकलते निकलते रह गई। उसकी आंखें पूरी तरह से सफेद हो चुकी थीं। उसकी आंखों की वो काली पुतलियां गायब थीं। उसका चेहरा एकदम पीला पड़ गया था और उसके चेहरे की नसें नीली और उभरी हुई दिख रही थीं। ये मेरी वो सुनीता नहीं थी


जिसे मैं जानता था। उसके अंदर किसी बुरी आत्मा का साया आ चुका था। वो एक डरावनी कहानी के किसी भूत की तरह लग रही थी पर ये कोई कहानी नहीं थी ये मेरे ही घर के बेडरूम में हो रहा था। तभी उसने अपना मुंह खोला और एक ऐसी आवाज निकाली जो सुनीता की हो ही नहीं सकती थी। वो एक बहुत ही खूंखार और भारी मर्द की आवाज थी। उस आवाज में वो बोली तूने मुझे यहां लाकर बहुत बड़ी गलती की है रमेश अब ये शरीर मेरा है। मेरे तो जैसे हाथ पैर सुन्न पड़ गए। मैं


बिस्तर से उठकर भागने की कोशिश करने लगा लेकिन तभी सुनीता ने जो कि एक बहुत ही दुबली पतली औरत थी एक ही झटके में मुझे बिस्तर पर दे मारा। उसके अंदर किसी इंसान की ताकत नहीं थी। उसने मेरा गला पकड़ लिया और उसके हाथ बर्फ की तरह ठंडे थे। कमरे में वही सड़े हुए मांस वाली बदबू फिर से भर गई थी जो कैब में आ रही थी। वो ताबीज उसके गले में लाल रंग से चमक रहा था जैसे उसमें कोई आग जल रही हो। वो मेरे गले को जोर से दबा रही थी और मैं अपनी


सांस के लिए तड़प रहा था। मुझे लगा कि आज मेरी मौत पक्की है और इस शैतान के चंगुल से मुझे कोई नहीं बचा सकता। मैं अपनी आखिरी सांसे गिन रहा था सुनीता के हाथों में इतनी ताकत आ गई थी कि मेरे लिए खुद को छुड़ाना नामुमकिन सा लग रहा था मेरा चेहरा नीला पड़ने लगा था और मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा रहा था मुझे लगा कि बस अब मेरा खेल खत्म है लेकिन मरता क्या न करता वाली बात थी मैंने अपनी पूरी जान लगाकर अपने पैर से उसे जोर से धक्का दिया किस्मत अच्छी थी


कि मेरा पैर सीधे उसके पेट पर लगा और वो छिटक कर दूर जा गिरी उसके हाथ मेरे गले से हटे तो मैं जोर जोर से खांसने लगा और लंबी लंबी सांसे लेने लगा वो जमीन पर गिरी हुई थी और एकदम से किसी जंगली जानवर की तरह गुर्राने लगी वो आवाज सुनकर मेरी पैंट गीली होने की नौबत आ गई थी बिना एक पल सोचे मैं कमरे से बाहर भागा और बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा दी मैं दरवाजे के बाहर फर्श पर बैठ गया और हांफ रहा था मेरे गले पर उसके नाखूनों के निशान छप गए


थे जिनमें से खून रिस रहा था तभी कमरे के अंदर से जो आवाजें आना शुरू हुईं उन्होंने मुझे और डरा दिया अंदर से ऐसा लग रहा था जैसे कोई बहुत भारी भरकम आदमी चीजों को तोड़ फोड़ रहा हो अलमारी के गिरने की आवाज आई शीशे के टूटने की आवाज आई और उन सबके बीच वो खौफनाक और भारी आवाज लगातार मुझे गालियां दे रही थी वो कह रहा था कि तू मुझे रोक नहीं पाएगा रमेश मैं इस औरत को खा जाऊंगा और तुझे भी मार डालूंगा मैं पूरी रात उस दरवाजे के बाहर बैठा कांपता रहा भगवान


का नाम जपता रहा और सुबह होने का इंतजार करता रहा अगर कोई ये सच्ची डरावनी कहानी सुनेगा तो शायद यकीन न करे लेकिन उस रात मैंने जो खौफ महसूस किया है वो सिर्फ मैं ही जानता हूँ जैसे तैसे सुबह हुई सूरज की रोशनी आते ही कमरे के अंदर से आने वाली आवाजें एकदम बंद हो गईं एकदम सन्नाटा छा गया मुझे डर लग रहा था कि कहीं सुनीता को कुछ हो न गया हो मैंने हिम्मत जुटाई और धीरे से कुंडी खोलकर दरवाजा हल्का सा धक्का देकर खोला अंदर का नजारा देखकर मेरे होश उड़ गए पूरा कमरा


तहस नहस था बेड टूट चुका था शीशा चकनाचूर था और सुनीता फर्श पर एक कोने में बेहोश पड़ी थी मैं भागकर उसके पास गया उसके माथे पर चोट लगी थी मैंने उसके मुंह पर पानी के छींटे मारे तो उसे होश आया वो मुझे देखकर रोने लगी और पूछने लगी कि कमरे को क्या हुआ और हम नीचे क्यों लेटे हैं उसे रात की कोई बात याद नहीं थी उसका बर्ताव बिल्कुल मेरी पुरानी सुनीता जैसा था डरी हुई और मासूम मुझे समझ आ गया कि रात को जो था वो सुनीता नहीं बल्कि वो शैतानी ताकत थी जो


उस ताबीज के जरिए उसके अंदर घुस गई थी मैंने देखा कि वो मनहूस ताबीज अब भी उसके गले में लटक रहा था मैंने उससे कहा कि सुनीता ये ताबीज उतार दो ये सब इसी की वजह से हो रहा है जैसे ही मैंने उस ताबीज को छूने के लिए हाथ बढ़ाया सुनीता की आंखें अचानक से फिर बदल गईं उसने मेरा हाथ जोर से झटक दिया और उसी भारी डरावनी आवाज में चिल्लाई कि इसे छूने की कोशिश भी मत करना वरना तेरा हाथ उखाड़ दूंगा मैं पीछे हट गया अगले ही पल वो फिर से नॉर्मल हो गई


और रोने लगी कि रमेश मुझे क्या हो रहा है मुझे बचा लो वो आत्मा उसके शरीर पर पूरी तरह हावी हो चुकी थी और उसके साथ खिलवाड़ कर रही थी मुझे पता था कि ये कोई बीमारी नहीं है और डॉक्टर के बस की बात नहीं है ये एक असली भूत की कहानी बन चुकी थी जो मेरी जिंदगी में चल रही थी मुझे किसी तांत्रिक या बाबा की मदद चाहिए थी मेरे पड़ोस में एक शर्मा जी रहते हैं जो इन सब चीजों के बारे में काफी जानते हैं मैं बहाने से घर से बाहर निकला और शर्मा


जी के पास गया मैंने उन्हें रात की पूरी खौफनाक घटना बताई पहले तो उन्हें यकीन नहीं हुआ लेकिन मेरी हालत और गले के निशान देखकर वो समझ गए कि मामला बहुत गंभीर है शर्मा जी ने बताया कि नजफगढ़ के पास एक पुराने बाबा रहते हैं जो रूहानी ताकतों और भूत प्रेत के मामलों को सुलझाते हैं हमें बिना देर किए उनके पास जाना चाहिए मैं शर्मा जी के साथ बाबा के पास पहुंचा वो एक छोटी सी कुटिया में बैठे थे और अजीब सी जड़ी बूटियों की महक आ रही थी मैंने बाबा को पूरी बात बताई और


उस ताबीज के बारे में बताया जो मुझे कैब में मिला था मेरी बात सुनकर बाबा का चेहरा गंभीर हो गया उन्होंने कहा कि बेटा तूने बहुत बड़ी गलती कर दी है वो कोई आम ताबीज नहीं है बल्कि एक अघोरी का बांधा हुआ शैतान है वो सवारी जिसे तूने गाड़ी में बिठाया था वो कोई इंसान नहीं था बल्कि उस शैतान का रक्षक था जो अपने बोझ को किसी और पर डालने के लिए शिकार ढूंढ रहा था और तू उसका शिकार बन गया अब वो शैतान तेरी पत्नी के शरीर पर कब्जा कर चुका है और जब तक


वो ताबीज उसके गले में है उसे कोई बाहर नहीं निकाल सकता बाबा की बातें सुनकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई बाबा ने मुझे भभूत दी और कहा कि इसे ले जाकर अपनी पत्नी के ऊपर डालना तब जाकर उसका असली रूप सामने आएगा उन्होंने कहा कि आज रात वो खुद मेरे घर आएंगे और उस आत्मा को निकालने की कोशिश करेंगे लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि ये बहुत खतरनाक हो सकता है और जान का खतरा भी है मैं वो भभूत लेकर घर वापस आया दोपहर का वक्त था और घर में एकदम शांति थी मुझे लगा सुनीता


सो रही होगी मैं दबे पांव बेडरूम में गया तो वहां कोई नहीं था तभी मुझे किचन से कुछ चबाने की आवाजें आने लगीं ऐसा लग रहा था जैसे कोई हड्डी चबा रहा हो मेरी रूह कांप उठी मैं धीरे धीरे किचन की तरफ बढ़ा जो मैंने देखा वो आज भी मेरे सपनों में आकर मुझे डराता है सुनीता जमीन पर बैठी थी और हमारे घर में रखा कच्चा मांस जो मैंने कल रात के लिए फ्रिज में रखा था उसे बिना पकाए कच्चा ही चबा रही थी उसके मुंह से खून टपक रहा था और उसके बाल खुले हुए


थे ये कोई भी हिंदी हॉरर स्टोरी या फिल्म का सीन नहीं था ये मेरी आंखों के सामने हो रहा सच था मेरी आहट सुनकर उसने मेरी तरफ देखा उसकी आंखों में वो सफेदपन फिर से आ गया था वो मांस का टुकड़ा फेंक कर मेरी तरफ झपटी लेकिन मुझे बाबा की दी हुई भभूत याद आई मैंने तुरंत अपनी जेब से भभूत निकाली और उसके ऊपर फेंक दी भभूत पड़ते ही वो जोर से चीखी उसकी चीख इतनी दर्दनाक और डरावनी थी कि मेरे कान सुन्न हो गए वो जमीन पर गिर कर तड़पने लगी और अजीब अजीब आवाजें


निकालने लगी उसका शरीर हवा में थोड़ा सा ऊपर उठ गया था और वो लगातार मुझे गालियां दे रही थी मैं भागकर कमरे से बाहर आ गया और दरवाजा बंद कर लिया अब मुझे बस रात होने का और बाबा के आने का इंतजार था घर के अंदर से आ रही वो भयानक आवाजें आस पड़ोस के लोगों को भी सुनाई देने लगी थीं लोग मेरे घर के बाहर जमा होने लगे थे पर मैंने किसी को अंदर नहीं आने दिया मुझे बस उस खौफनाक रात का इंतजार था जो मेरी जिंदगी की सबसे भयानक रात होने वाली थी शाम


ढलते ही घर के बाहर भीड़ लग गई थी लेकिन मैंने हाथ जोड़कर सबको वहां से भेज दिया रात के करीब आठ बजे बाबा अपने दो चेलों के साथ मेरे घर पहुंचे उनके हाथ में एक झोला था जिसमें पूजा का सामान था घर में घुसते ही बाबा ने कहा कि घर में बहुत भारी निगेटिव एनर्जी है उन्होंने मुझे किचन का दरवाजा खोलने को कहा मेरी तो हिम्मत ही नहीं हो रही थी लेकिन बाबा के कहने पर मैंने कांपते हाथों से कुंडी खोल दी दरवाजा खुलते ही जो सड़ांध बाहर आई उससे बाबा के चेलों को उल्टियां होने


लगीं अंदर घुप्प अंधेरा था बाबा ने अपने हाथ में एक मशाल जैसी जलाई रोशनी होते ही हमने देखा कि सुनीता किचन की छत से चिपकी हुई थी उल्टी मकड़ी की तरह उसकी गर्दन पूरी 180 डिग्री घूमी हुई थी और वो हमें ही घूर रही थी बाबा ने जोर से कोई मंत्र पढ़ा और उसके ऊपर पवित्र जल फेंका पानी की बूंदें पड़ते ही वो छत से धड़ाम से नीचे गिरी और बाबा की तरफ झपटी लेकिन बाबा ने जमीन पर पहले ही एक सुरक्षा घेरा बना लिया था वो उस घेरे के अंदर नहीं आ पा रही थी


वो घेरे के बाहर पागलों की तरह हाथ मार रही थी और गंदी गंदी गालियां दे रही थी वो आवाज बिल्कुल एक खूंखार राक्षस जैसी थी बाबा ने मुझे कहा कि रमेश असली काम अब शुरू होगा मुझे किसी तरह इसके गले से वो ताबीज तोड़ना होगा लेकिन अगर मैं घेरे से बाहर गया तो ये मुझे मार डालेगी बाबा ने मुझे एक पवित्र धागा दिया और कहा कि मैं पीछे से जाकर उसे पकड़ूं और ये धागा उसके गले में डाल दूं ये मेरे लिए मौत के मुंह में जाने जैसा था लेकिन सुनीता को बचाने का यही एक


रास्ता था मैं चुपके से पीछे की तरफ गया वो पूरी तरह बाबा पर अपना गुस्सा निकाल रही थी मैंने हिम्मत जुटाई और पीछे से जाकर सुनीता को कसकर पकड़ लिया उसके शरीर से बर्फ जैसी ठंडक आ रही थी और वो इतनी ताकत से हिल रही थी कि मुझे लगा मेरी हड्डियां टूट जाएंगी उसने अपने नाखून मेरे हाथों में गाड़ दिए खून बहने लगा लेकिन मैंने उसे नहीं छोड़ा मैंने वो धागा उसके गले में डाल दिया धागा डलते ही वो जोर से चीखी और उसका शरीर एकदम से अकड़ गया इसी मौके का फायदा उठाकर बाबा घेरे


से बाहर आए और उन्होंने एक चिमटे से वो तांबे का ताबीज पकड़ लिया जैसे ही बाबा ने ताबीज खींचा सुनीता के मुंह से एक भयानक काली धुएं जैसी चीज निकली जो सीधा बाबा के चेहरे की तरफ गई लेकिन बाबा ने तुरंत ताबीज को आग में फेंक दिया और जोर से मंत्र पढ़ने लगे वो काला धुआं हवा में ही तड़पने लगा और एक जोरदार धमाके के साथ गायब हो गया कमरे में एकदम से शांति छा गई वो सड़ी हुई बदबू भी कम होने लगी सुनीता बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ी थी मैं भागकर उसके पास गया


और उसका सिर अपनी गोद में रख लिया बाबा ने बताया कि वो शैतान अब हमेशा के लिए खत्म हो गया है लेकिन सुनीता को ठीक होने में वक्त लगेगा आज इस बात को छह महीने बीत चुके हैं सुनीता अब बिल्कुल ठीक है लेकिन हम उस घर को छोड़कर दूसरी जगह आ गए हैं मैं आज भी रात की शिफ्ट में कैब चलाता हूं लेकिन अब मैं किसी भी सुनसान जगह पर गाड़ी नहीं रोकता और ना ही किसी अनजान की छूटी हुई चीज को हाथ लगाता हूं ये घटना मेरे दिमाग में इस कदर छप गई है कि


रात को सोते हुए भी अगर दरवाजा खड़कता है तो मेरी आंखें खुल जाती हैं ये कोई कहानी नहीं मेरी जिंदगी का वो भयानक सच है जिसे मैं मरते दम तक नहीं भूल सकता

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