बस स्टैंड वाली लड़की Hindi Horror Story

बस स्टैंड पर खड़ी रहस्यमयी लड़की का डरावना दृश्य



 मेरा नाम विकास है… और जो मैं तुम्हें बताने जा रहा हूँ, वो कोई कहानी नहीं है। काश ये सिर्फ एक कहानी होती। लेकिन ये सब मेरे साथ सच में हुआ है… और आज भी जब रात के ठीक 2:45 बजते हैं, मेरी नींद अपने आप खुल जाती है… क्योंकि मुझे पता है कि 3 बजे के बाद कुछ भी हो सकता है। ये घटना करीब 2 साल पहले की है, जब मैं अपने गाँव से शहर काम के सिलसिले में आया था। शहर मेरे लिए नया था… और नौकरी


भी रात की शिफ्ट में थी। मुझे एक प्राइवेट कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की जॉब मिली थी, जहाँ मुझे रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक ड्यूटी करनी होती थी। शुरुआत में सब ठीक था… लेकिन एक चीज थी जो मुझे हमेशा अजीब लगती थी — वो था ऑफिस से करीब 500 मीटर दूर एक पुराना बस स्टैंड। वो बस स्टैंड दिन में भी सूना रहता था… लेकिन रात में तो वहाँ एक अजीब सा सन्नाटा छा जाता था। ऐसा लगता था जैसे वहाँ कोई आता-जाता ही नहीं। आसपास


की सारी दुकानों के शटर बंद रहते थे, और सिर्फ एक टूटी-फूटी ट्यूबलाइट जलती थी, जो हर कुछ सेकंड में झपकती रहती थी। पहले कुछ दिनों तक मैंने उस बस स्टैंड पर ध्यान नहीं दिया… लेकिन फिर एक रात कुछ ऐसा हुआ जिसने सब बदल दिया। उस रात मेरी ड्यूटी थोड़ी जल्दी खत्म हो गई थी। करीब 2:30 बज रहे थे। मैंने सोचा कि पैदल ही अपने कमरे तक चला जाऊँ, क्योंकि वो ज्यादा दूर नहीं था। जैसे ही मैं उस बस स्टैंड के पास पहुँचा, मैंने देखा कि वहाँ


कोई खड़ा है। पहले तो मुझे लगा कि कोई आम इंसान होगा… लेकिन जैसे ही मैं थोड़ा पास गया, मुझे कुछ अजीब महसूस हुआ। वो एक लड़की थी… सफेद सलवार-कमीज पहने हुए, और उसके बाल उसके चेहरे पर आधे ढके हुए थे। वो बिल्कुल सीधी खड़ी थी… बिना हिले। मैंने सोचा कि शायद उसे किसी बस का इंतजार होगा। लेकिन उस समय कोई बस चलती ही नहीं थी। मैंने उसे नजरअंदाज किया और आगे बढ़ने लगा… तभी उसने अचानक मेरी तरफ देखा। उसकी आँखें… मैं आज तक नहीं भूल पाया।


वो सामान्य नहीं थीं। ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझे आर-पार देख रही हों… जैसे उसे मेरे बारे में सब पता हो। मैं थोड़ा असहज हो गया, लेकिन फिर भी मैंने खुद को संभाला और आगे बढ़ गया। जैसे ही मैं उसके पास से गुजरने लगा, उसने धीरे से कहा — “क्या आपने मुझे पहले देखा है?” उसकी आवाज बहुत धीमी थी… लेकिन साफ सुनाई दे रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे वो सीधे मेरे दिमाग में बोल रही हो। मैं रुक गया। मुझे समझ नहीं आया कि


मैं क्या जवाब दूँ। मैंने उसे गौर से देखा… लेकिन मुझे याद नहीं आया कि मैंने उसे कभी पहले देखा हो। मैंने धीरे से कहा — “नहीं… शायद नहीं।” कुछ सेकंड तक वो मुझे घूरती रही… फिर उसने धीरे से सिर झुका लिया और फिर से वहीं खड़ी हो गई। मैंने राहत की सांस ली और वहाँ से जल्दी-जल्दी निकल गया। उस रात मैं अपने कमरे में पहुँचा, लेकिन मुझे नींद नहीं आई। उसके सवाल ने मुझे बेचैन कर दिया था। अगले दिन मैंने ऑफिस में अपने एक साथी, राजेश,


से इस बारे में बात की। जैसे ही मैंने उसे “बस स्टैंड वाली लड़की” के बारे में बताया… उसका चेहरा एकदम बदल गया। वो कुछ सेकंड तक चुप रहा… फिर धीरे से बोला — “तूने उससे बात की?” मैंने कहा — “हाँ… उसने मुझसे पूछा कि क्या मैंने उसे पहले देखा है।” राजेश ने तुरंत मेरी तरफ देखा और बोला — “और तूने क्या जवाब दिया?” मैंने कहा — “मैंने ‘नहीं’ कहा।” ये सुनते ही उसने राहत की सांस ली। मैंने पूछा — “क्या हुआ? तू इतना डर क्यों गया?”


राजेश ने धीरे-धीरे बताया — “उस बस स्टैंड के बारे में यहाँ बहुत पुरानी कहानी है… कहते हैं कि वहाँ एक लड़की मर गई थी… कई साल पहले। वो हर रात वहाँ आती है… और लोगों से वही सवाल पूछती है। जो भी ‘हाँ’ कह देता है… वो अगले दिन जिंदा नहीं मिलता।” मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। मैंने हँसने की कोशिश की — “ये सब बकवास है।” लेकिन अंदर से मुझे डर लग रहा था। उस रात मैं जानबूझकर उस रास्ते से नहीं गया। लेकिन कुछ दिनों बाद…


मुझे फिर से उसी रास्ते से जाना पड़ा। उस रात करीब 3 बजे थे। जैसे ही मैं बस स्टैंड के पास पहुँचा… मेरा दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। और फिर… मैंने उसे फिर से देखा। वो वहीं खड़ी थी… बिल्कुल उसी जगह… उसी हालत में। इस बार मैंने तय किया कि मैं उसे नजरअंदाज कर दूँगा। मैं तेज कदमों से आगे बढ़ने लगा। लेकिन जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा… उसने फिर से कहा — “क्या आपने मुझे पहले देखा है?” इस बार उसकी आवाज पहले से ज्यादा ठंडी थी।


मैंने बिना रुके कहा — “नहीं।” और आगे बढ़ गया। लेकिन इस बार कुछ अलग हुआ। जैसे ही मैं उससे थोड़ा दूर पहुँचा… मुझे ऐसा लगा जैसे कोई मेरे पीछे-पीछे चल रहा हो। मैंने हिम्मत करके पीछे मुड़कर देखा… लेकिन वहाँ कोई नहीं था। मैंने खुद को समझाया कि ये मेरा वहम है। लेकिन जैसे ही मैं अपने कमरे में पहुँचा… मैंने देखा कि दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। मैं हमेशा उसे लॉक करके जाता था। मेरा दिल जोर से धड़कने लगा। मैं धीरे-धीरे अंदर गया… कमरे में सब कुछ


अपनी जगह पर था। लेकिन फिर मेरी नजर मेरे बिस्तर पर पड़ी। वहाँ… कोई बैठा हुआ था। मैं जम गया। लेकिन जैसे ही मैंने ध्यान से देखा… वहाँ कोई नहीं था। सिर्फ चादर पर बैठने के निशान थे। उस रात मैं बिल्कुल नहीं सो पाया। अगले दिन मैंने फैसला किया कि मैं उस बस स्टैंड के बारे में और पता करूँगा। मैं आसपास के लोगों से पूछने लगा… लेकिन कोई भी खुलकर कुछ नहीं बताता था। फिर मुझे एक बूढ़ा आदमी मिला, जो पास की एक चाय की दुकान चलाता


था। मैंने उससे उस लड़की के बारे में पूछा। वो कुछ देर तक चुप रहा… फिर बोला — “तुमने उसे देख लिया है… अब वो तुम्हें छोड़ेगी नहीं।” मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैंने पूछा — “मतलब?” वो धीरे से बोला — “वो हर किसी को दो बार मौका देती है… तीसरी बार… वो खुद जवाब तय करती है।” मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई। उस रात मैं बहुत डरा हुआ था। लेकिन मुझे ड्यूटी पर जाना ही था। मैंने खुद से कहा कि आज मैं उस रास्ते से


नहीं जाऊँगा। लेकिन उस रात… कुछ ऐसा हुआ जो मैंने कभी सोचा भी नहीं था। करीब 2:50 बजे… ऑफिस के अंदर ही मुझे किसी के चलने की आवाज़ सुनाई दी। मैंने सोचा कोई अंदर घुस आया है। मैंने टॉर्च उठाई और आवाज़ की तरफ बढ़ा। जैसे ही मैं कॉरिडोर में पहुँचा… मुझे दूर एक आकृति दिखाई दी। वो… वही लड़की थी। वो ऑफिस के अंदर खड़ी थी। मैं पूरी तरह से जम गया। वो धीरे-धीरे मेरी तरफ मुड़ी… और मुस्कुराई। उसकी मुस्कान… इंसानी नहीं थी। फिर उसने वही सवाल पूछा


— “क्या आपने मुझे पहले देखा है?” इस बार… मैं कुछ बोल ही नहीं पाया। मेरी आवाज जैसे बंद हो गई थी। वो धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगी… हर कदम के साथ… उसकी चाल और अजीब होती जा रही थी। जैसे उसके पैर जमीन को छू ही नहीं रहे हों। मैं पीछे हटने लगा… लेकिन अचानक… मेरी पीठ दीवार से टकरा गई। अब वो मेरे बिल्कुल सामने थी। उसकी आँखें… पूरी तरह काली हो चुकी थीं। उसने अपना चेहरा मेरे बहुत पास लाकर धीरे से कहा — “तुमने मुझे दो


बार देखा है…” मेरी सांस रुक गई। “अब… तीसरी बार… तुम झूठ नहीं बोल पाओगे…” मेरे कानों में तेज आवाज गूंजने लगी… और फिर… सब कुछ अंधेरा हो गया। जब मेरी आँख खुली… तो सबसे पहले मुझे ठंड का एहसास हुआ। ऐसी ठंड, जैसे मैं किसी बर्फीली जगह पर पड़ा हूँ। धीरे-धीरे मैंने अपनी आँखें खोलीं… लेकिन जो मैंने देखा, उसने मेरे होश उड़ा दिए। मैं अपने कमरे में नहीं था। मैं उसी बस स्टैंड पर था। वो टूटी हुई बेंच… वही झपकती हुई ट्यूबलाइट… और चारों तरफ वही खामोशी,


जो अब पहले से भी ज्यादा भारी लग रही थी। मेरा सिर दर्द से फटा जा रहा था, और शरीर बिल्कुल सुन्न था। मैंने उठने की कोशिश की… लेकिन जैसे ही मैं खड़ा हुआ, मुझे एहसास हुआ कि वहाँ कुछ गड़बड़ है। बस स्टैंड खाली नहीं था। वहाँ कोई और भी था। मेरी नजर धीरे-धीरे उस तरफ गई… और मेरा दिल जैसे रुक गया। वो लड़की… अब मेरे ठीक सामने खड़ी थी। लेकिन इस बार… कुछ अलग था। उसका चेहरा साफ दिख रहा था। और जैसे ही मैंने उसे देखा…


मेरी साँस अटक गई। वो चेहरा… मेरा जाना-पहचाना था। मैंने उसे पहले देखा था। लेकिन कब… कहाँ… ये याद नहीं आ रहा था। वो धीरे-धीरे मुस्कुराई… और फिर बोली — “अब तो याद आ गया होगा…?” मेरे मुँह से आवाज ही नहीं निकली। मैं पीछे हटने लगा… लेकिन मेरे पैर जैसे जमीन में धँस गए थे। फिर उसने धीरे-धीरे अपना हाथ उठाया… और बस स्टैंड के पीछे की तरफ इशारा किया। मैंने मजबूरी में उस दिशा में देखा… और जो मैंने देखा… उसने मेरी पूरी दुनिया हिला दी। वहाँ… एक


पेड़ के पास… एक लड़की की लाश पड़ी थी। सफेद कपड़ों में… चेहरा खून से लथपथ… और वो चेहरा… बिल्कुल उसी लड़की जैसा था, जो मेरे सामने खड़ी थी। मैंने डर के मारे अपनी आँखें बंद कर लीं। “ये… ये क्या है…?” मैंने किसी तरह कहा। उसने बहुत शांत आवाज में जवाब दिया — “ये मैं हूँ…” मेरे शरीर में जैसे बिजली दौड़ गई। मैंने फिर से उस लाश को देखा… और फिर उसकी तरफ। दोनों एक ही थीं। “लेकिन… कैसे…?” मेरी आवाज काँप रही थी। वो कुछ सेकंड तक


चुप रही… फिर बोली — “तुम्हें सच जानना है… तो याद करना होगा।” अचानक… मेरे दिमाग में एक तेज झटका सा लगा। जैसे कोई पुरानी याद जबरदस्ती मेरे अंदर घुस रही हो। मैंने अपने सिर को पकड़ लिया… और फिर… धीरे-धीरे… मुझे सब याद आने लगा। वो दिन… करीब 3 साल पहले का। मैं उस समय भी इसी शहर में था… लेकिन तब मेरी नौकरी कुछ और थी। मैं रात को बाइक से घर लौट रहा था। समय करीब 11 बजे का था। सड़क सुनसान थी। जैसे ही मैं उस


बस स्टैंड के पास पहुँचा… मैंने देखा कि एक लड़की सड़क के किनारे खड़ी थी। वो परेशान लग रही थी। उसने मुझे हाथ देकर रोका। मैं रुक गया। उसने कहा कि उसकी बस छूट गई है… और उसे पास के गाँव तक जाना है। मैंने थोड़ा सोचा… फिर उसे अपनी बाइक पर बैठा लिया। वो रास्ते भर चुप रही। बस स्टैंड से थोड़ा आगे एक मोड़ आता है… और वहीं… सब कुछ बदल गया। अचानक सड़क पर एक कुत्ता आ गया। मैंने बाइक मोड़ने की कोशिश की… लेकिन कंट्रोल खो


बैठा। बाइक फिसल गई… और हम दोनों गिर गए। मैं सड़क के किनारे जा गिरा… लेकिन वो… वो सीधे सामने पत्थरों पर गिरी। उसके सिर से खून निकलने लगा। मैं घबरा गया। मैं उसके पास गया… लेकिन वो हिल नहीं रही थी। उसकी आँखें खुली थीं… लेकिन उनमें कोई हरकत नहीं थी। वो मर चुकी थी। उस पल… मैंने सबसे बड़ी गलती की। मैं डर गया। मैंने पुलिस को नहीं बुलाया। मैंने किसी को नहीं बताया। मैं वहाँ से भाग गया। मैंने सोचा… कोई नहीं जान पाएगा। मैंने उस रात


को अपने दिमाग से निकाल दिया… या कम से कम… कोशिश की। लेकिन आज… सब कुछ वापस आ चुका था। मैं जमीन पर गिर पड़ा। “ये… ये मेरी गलती थी…” मैंने रोते हुए कहा। वो धीरे-धीरे मेरे पास आई… और मेरे सामने झुक गई। उसकी आँखों में अब गुस्सा नहीं था… सिर्फ एक अजीब सी शांति थी। “मैंने तुम्हें दो बार मौका दिया…” उसने कहा। “पहली बार… जब तुमने ‘नहीं’ कहा… मैं चली गई।” “दूसरी बार… तुम फिर झूठ बोले…” मेरे आँसू रुक नहीं रहे थे। “और अब…” उसने मेरी


आँखों में देखते हुए कहा — “तीसरी बार… सच सामने है।” अचानक… चारों तरफ की हवा बदलने लगी। ट्यूबलाइट तेजी से झपकने लगी। और फिर… मुझे महसूस हुआ कि मैं अकेला नहीं हूँ। मैंने चारों तरफ देखा… और मेरी रूह काँप गई। बस स्टैंड के चारों ओर… बहुत सारे लोग खड़े थे। लेकिन वो लोग नहीं थे। उनके शरीर टूटे हुए थे… चेहरे खून से भरे हुए… जैसे वो सब भी किसी हादसे में मरे हों। वो सब मुझे देख रहे थे। “ये सब…” मैंने डरते हुए पूछा। वो बोली


— “ये वो लोग हैं… जिन्होंने मुझे देखा… और झूठ बोला।” मेरी साँस रुकने लगी। वो सब धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ने लगे। मैंने भागने की कोशिश की… लेकिन मेरे पैर हिल नहीं रहे थे। फिर वो लड़की मेरे बिल्कुल पास आई… और धीरे से बोली — “अब तुम भी हमारे साथ रहोगे…” मैं चिल्लाना चाहता था… लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। अचानक… उन सभी ने मुझे पकड़ लिया। उनके हाथ बर्फ जैसे ठंडे थे। मैं दर्द से चीख उठा। और फिर… सब कुछ अंधेरा हो गया। जब अगली सुबह


लोगों ने बस स्टैंड के पास एक लाश देखी… तो वो मेरी थी। मेरी आँखें खुली थीं… और चेहरे पर वही डर जमी हुई थी। लोगों ने कहा… ये कोई हादसा था। लेकिन कुछ लोगों ने ये भी कहा… कि रात को वहाँ फिर से किसी को देखा गया था। एक नया चेहरा… जो हर आने-जाने वाले से पूछ रहा था — “क्या आपने मुझे पहले देखा है?”

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